पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना का महापर्व करवा चौथ गुरुवार को कोटा संभाग में मनाया गया। सुबह 'सरगी' से शुरू हुआ व्रतियों का उपवास रात को चंद्र दर्शन और अर्घ्य के साथ संपन्न होना था। हालांकि, आसमान में बादलों के चलते चांद के दीदार के लिए महिलाओं को इंतजार करना पड़ा। दिन ढलते ही शहर के प्रमुख मंदिरों और कॉलोनियों में करवा चौथ पूजन की धूम देखने को मिली। महिलाओं ने एक साथ बैठकर सुनी कथा शहर के प्रसिद्ध शीतला माता मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जहां सैकड़ों की संख्या में सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार कर सामूहिक पूजन के लिए पहुंचीं। इसके अलावा तलवंडी, गुमानपुरा, महावीर नगर, नयापुरा और दादाबाड़ी क्षेत्र के मंदिरों में भी शाम होते ही महिलाओं का जमघट लग गया। महिलाओं ने एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनी। थाली बांटने की रस्म निभाई और एक-दूसरे को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद दिया। घरों में भी सजीं पूजा की थालियां मंदिरों के साथ-साथ शहर के घर-घर में भी पूजन की विशेष तैयारियां देखी गईं। छतों और आंगन में सुंदर रंगोली सजाई गई और पूजा की थाली में दीपक, करवा, फल और मिठाई सजाकर सुहागिनों ने पूजा की। बुजुर्ग महिलाओं से आशीर्वाद लेकर कथा सुनी गई। बादलों ने बढ़ाया इंतजार, एप और पंचांग से मिला सहारा शाम को पूजन के बाद सभी की निगाहें आसमान पर टिकी रहीं, लेकिन कोटा में आसमान पर छाए बादलों ने चांद का दीदार आसान नहीं होने दिया। रात में चांद निकलने के तय समय के बाद भी काफी देर तक बादल छाए रहे। ऐसे में महिलाओं को चांद के निकलने इंतजार करना पड़ा। महिलाओं ने शुभ मुहूर्त के अनुसार, पंचांग और ज्योतिषीय समय के आधार पर पूजन प्रक्रिया पूरी की। महिलाओं ने छलनी से पति के चेहरे को देखा और दूसरे शहरों में रहने वाले रिश्तेदारों से चांद निकलने की जानकारी मिलने के बाद अर्घ्य दिया और जल ग्रहण कर अपना व्रत खोला।
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