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14h ago हिंदी
अर्जेंटीना ने भारत का विश्व कप सपना तोड़ा, 3-5 की हार के साथ सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हुई टीम इंडिया
एम्सटेलवीन. भारतीय पुरुष हॉकी टीम का 2026 विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचने का सपना सोमवार को अर्जेंटीना के खिलाफ 3-5 की हार के साथ टूट गया. करो या मरो के इस मुकाबले में भारत को सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए बड़े अंतर से जीत दर्ज करनी थी, लेकिन मुकाबले की शुरुआत से ही अर्जेंटीना ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए भारतीय रक्षापंक्ति पर दबाव बना दिया. शुरुआती मिनटों में मिले झटकों के बाद भारत ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन अर्जेंटीना ने लगातार गोल करते हुए मैच पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी. भारतीय टीम की इस हार के साथ विश्व कप पदक के लिए उसका लंबा इंतजार भी जारी रहेगा. भारत ने पुरुष हॉकी विश्व कप में आखिरी बार 1975 में स्वर्ण पदक जीता था. इसके बाद से टीम विश्व कप के पोडियम तक नहीं पहुंच सकी है. 1971 में भारत ने कांस्य, 1973 में रजत और 1975 में स्वर्ण पदक जीता था, लेकिन उसके बाद विश्व कप में भारत की पदक यात्रा आगे नहीं बढ़ सकी. इस बार टीम से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन अर्जेंटीना के खिलाफ हार ने उन उम्मीदों पर विराम लगा दिया. मैच में अर्जेंटीना ने शुरुआत से ही भारत को दबाव में ला दिया. मुकाबले के पहले ही मिनट में जोआक्विन टोस्कानी ने फील्ड गोल कर अर्जेंटीना को 1-0 की बढ़त दिला दी. भारत अभी इस शुरुआती झटके से उबर भी नहीं पाया था कि छठे मिनट में निकोलस डेला टोरे ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर स्कोर 2-0 कर दिया. महज छह मिनट में दो गोल गंवाने के कारण भारतीय टीम पर दबाव बढ़ गया. भारत ने हालांकि हार नहीं मानी और दसवें मिनट में सुखजीत सिंह ने शानदार फील्ड गोल कर स्कोर 1-2 कर दिया. इस गोल के बाद भारतीय टीम में उम्मीद जगी और कुछ समय के लिए उसने अर्जेंटीना पर दबाव बनाने की कोशिश की. भारत के खिलाड़ियों ने आक्रमण तेज किया, लेकिन अर्जेंटीना की रक्षापंक्ति ने लगातार हमलों को रोकते हुए अपनी बढ़त बनाए रखी. भारतीय टीम को पेनल्टी कॉर्नर के मौके भी मिले, लेकिन उन्हें गोल में बदलने में अपेक्षित सफलता नहीं मिली. दूसरे हाफ में अर्जेंटीना ने एक बार फिर भारत की रक्षापंक्ति की कमजोरी का फायदा उठाया. 33वें मिनट में टॉमस डोमेने ने गोल करके अर्जेंटीना की बढ़त 3-1 कर दी. इसके बाद 45वें मिनट में डोमेने ने ही पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदलकर भारत की मुश्किलें और बढ़ा दीं. अर्जेंटीना अब 4-1 से आगे था और भारत के लिए वापसी बेहद कठिन हो चुकी थी. 53वें मिनट में अर्जेंटीना ने भारत को एक और झटका दिया. जोआक्विन टोस्कानी ने अपना दूसरा गोल करते हुए स्कोर 5-1 कर दिया. पांच गोल खाने के बाद भारतीय टीम के सामने अब केवल हार का अंतर कम करने की चुनौती रह गई थी. इसके बावजूद खिलाड़ियों ने अंतिम मिनटों तक संघर्ष जारी रखा और मुकाबले को पूरी तरह छोड़ने के बजाय आक्रामक खेल दिखाने की कोशिश की. भारत को इसका फायदा 58वें मिनट में मिला, जब सुखजीत सिंह ने अपना दूसरा गोल कर स्कोर 2-5 किया. इसके ठीक एक मिनट बाद हार्दिक सिंह ने पेनल्टी स्ट्रोक को गोल में बदलते हुए भारत को 3-5 तक पहुंचा दिया. लगातार दो गोलों से भारतीय खेमे में उम्मीद जरूर जगी, लेकिन मुकाबले में समय बहुत कम बचा था. भारत को अब कम से कम दो और गोल की जरूरत थी और अर्जेंटीना की रक्षापंक्ति दबाव के बावजूद मजबूती से खड़ी रही. मैच के अंतिम क्षणों में भारत को एक और महत्वपूर्ण मौका मिला. अंतिम हूटर बजने से ठीक पहले कप्तान हरमनप्रीत सिंह के प्रयास से भारत को पेनल्टी कॉर्नर मिला. यह भारत के लिए आखिरी उम्मीद थी. हरमनप्रीत ने ड्रैग फ्लिक लगाया, लेकिन अर्जेंटीना के गोलकीपर ने शानदार बचाव करते हुए गेंद को रोक दिया. इसके साथ ही भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीद पूरी तरह समाप्त हो गई. भारत की हार का सबसे बड़ा कारण उसकी रक्षापंक्ति का प्रदर्शन रहा. पूरे टूर्नामेंट में टीम ने कई मौकों पर गोल खाए और अर्जेंटीना के खिलाफ भी शुरुआती मिनटों में दो गोल गंवाने के बाद भारतीय टीम दबाव में आ गई. विश्व कप में भारत ने पांच मुकाबलों के दौरान 16 गोल खाए, जो उसकी रक्षात्मक कमजोरी को स्पष्ट करता है. आक्रमण में टीम के पास मौके थे, लेकिन महत्वपूर्ण मौकों पर उन्हें गोल में बदलने की क्षमता अपेक्षित स्तर पर नहीं रही. भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण था क्योंकि पिछले मैच में नीदरलैंड्स के खिलाफ हार के बाद सेमीफाइनल की राह काफी कठिन हो गई थी. अर्जेंटीना के खिलाफ जीत ही भारत को अंतिम चार की दौड़ में बनाए रख सकती थी. लेकिन भारत की शुरुआत खराब रही और अर्जेंटीना ने शुरुआती बढ़त का पूरा फायदा उठाया. अर्जेंटीना की जीत ने उसे सेमीफाइनल की दौड़ में मजबूत स्थिति में पहुंचाया, जबकि भारत का अभियान पदक की दौड़ से बाहर हो गया. भारतीय टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत हालांकि सकारात्मक अंदाज में की थी. टीम ने वेल्स को 3-1 से हराया, जबकि पाकिस्तान के खिलाफ 5-3 की शानदार जीत दर्ज की. इंग्लैंड के खिलाफ भारत को 2-4 से हार का सामना करना पड़ा. दूसरे चरण में नीदरलैंड्स के खिलाफ भी भारतीय टीम को हार मिली और अर्जेंटीना के खिलाफ मिली शिकस्त ने अंतिम चार की उम्मीद पूरी तरह खत्म कर दी. कप्तान हरमनप्रीत सिंह की अगुआई वाली भारतीय टीम के लिए अब टूर्नामेंट में पदक की कोई संभावना नहीं बची है. भारत अब सातवें और आठवें स्थान के लिए होने वाले वर्गीकरण मुकाबले में खेलेगा. यानी टीम के पास विश्व कप अभियान का समापन बेहतर स्थान के साथ करने का एक मौका जरूर रहेगा, लेकिन जिस लक्ष्य के साथ टीम टूर्नामेंट में उतरी थी, वह पूरा नहीं हो सका है. इस हार के बाद भारतीय टीम प्रबंधन के सामने कई सवाल भी खड़े होंगे. खास तौर पर रक्षापंक्ति में लगातार हुई गलतियां, शुरुआती दबाव को संभालने में नाकामी और पेनल्टी कॉर्नर के मौकों का पूरा फायदा नहीं उठा पाना टीम के लिए चिंता का विषय रहेगा. अर्जेंटीना के खिलाफ भारत ने अंतिम समय में वापसी की कोशिश की, लेकिन विश्व कप जैसे बड़े मंच पर शुरुआत में मिली बढ़त को खत्म करना आसान नहीं था. भारतीय खिलाड़ियों के लिए अब अगले बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने का समय है. विश्व कप अभियान खत्म होने के बाद टीम का ध्यान एशियाई खेलों पर होगा, जो अगले महीने जापान के आइची-नागोया में शुरू होने वाले हैं. विश्व कप में मिली निराशा के बाद भारतीय टीम वहां बेहतर प्रदर्शन के साथ वापसी करना चाहेगी. अर्जेंटीना के खिलाफ 3-5 की हार ने भारत के विश्व कप अभियान का अंत भले ही निराशाजनक तरीके से किया हो, लेकिन अंतिम मिनटों में टीम ने जिस तरह दो गोल करके मुकाबले में वापसी की कोशिश की, उससे खिलाड़ियों की लड़ने की क्षमता भी दिखाई दी. हालांकि, विश्व कप जैसे बड़े मंच पर शुरुआती गलतियों की कीमत बहुत भारी होती है. भारत के लिए यही हुआ. अर्जेंटीना ने शुरुआत में बढ़त बनाई, उसे लगातार मजबूत किया और अंततः भारत की सेमीफाइनल की उम्मीदों को खत्म कर दिया. अब भारतीय हॉकी टीम को सातवें-आठवें स्थान के मुकाबले में उतरना होगा और इसके बाद एशियाई खेलों में नई शुरुआत करनी होगी.