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12h ago हिंदी
बक्सर में 102 साल पुरानी रामलीला के मंच पर ताला:5 दिन मंचन के बाद कार्रवाई से भड़के लोग, ईओ बोलीं- मैं सनातन विरोधी नहीं हूं
बक्सर जिले के चौसा बाजार में 102 साल पुरानी रामलीला के मंच पर ताला लगाने को लेकर विवाद हो गया। चौसा नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने साक्षरता भवन सह रामलीला मंच पर दूसरा ताला लगवा दिया। इसके बाद स्थानीय लोग भड़क गए और मौके पर जमकर हंगामा किया। लोगों ने ईओ के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की। यहां 1925 से रामलीला का आयोजन हो रहा है। इस बार पांच दिन का मंचन पूरा हो चुका था और चार दिन बाकी थे। ऐसे में रामलीला के बीच तालाबंदी को लेकर विवाद शुरू हो गया। ताला खोलने के साथ ईओ को बुलाने की मांग पर अड़े लोग हंगामे की सूचना पर मुफस्सिल थानाध्यक्ष शंभू भगत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी कार्यपालक पदाधिकारी को मौके पर बुलाने और उनसे माफी मंगवाने की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि केवल ताला खोल देना पर्याप्त नहीं है। जनप्रतिनिधि बोले- पहले बातचीत करनी चाहिए थी उपमुख्य पार्षद प्रतिनिधि विकास राज ने कहा कि कार्यपालक पदाधिकारी को ताला लगाने से पहले नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों से बातचीत करनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत बनने के बाद पिछले चार वर्षों से रामलीला का आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से होता रहा है। इस बार पांच दिन तक मंचन होने के बाद तालाबंदी करना समझ से परे है। उन्होंने आशंका जताई कि इस कार्रवाई से दुर्गापूजा के दौरान बना माहौल बिगड़ सकता है। स्थानीय लोगों ने भी कार्रवाई पर उठाए सवाल स्थानीय निवासी धनजी तिवारी ने कहा कि कार्यपालक पदाधिकारी पहले भी रामलीला के दौरान निरीक्षण कर चुकी हैं। उन्हें जानकारी थी कि यहां पांच दिनों से रामलीला हो रही है। इसके बावजूद पहले से लगे ताले के ऊपर दूसरा ताला लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि रामलीला के आयोजकों के पास भवन की चाबी रहती है और रात में मंचन होता है। ऐसे में आयोजन के बीच ताला लगाने की जरूरत पर सवाल उठते हैं। वहीं, अभिमन्यु सिंह कुशवाहा ने आरोप लगाया कि रामलीला मंच पर तालाबंदी से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि चौसा का रामलीला मंच स्थानीय लोगों के लिए आन-बान-शान का प्रतीक है और इस मामले में जिम्मेदार लोगों को जवाब देना चाहिए। ईओ बोलीं- भवन सार्वजनिक है, रामलीला रोकने का इरादा नहीं विवाद पर कार्यपालक पदाधिकारी रानी कुमारी ने कहा कि वह सनातन विरोधी नहीं हैं और मामले को जानबूझकर तूल दिया जा रहा है। उनके अनुसार, जिस भवन को लोग रामलीला मंच कह रहे हैं, वह साक्षरता भवन है और सार्वजनिक उपयोग के लिए है। ईओ ने बताया कि बाजार में नाली निर्माण का निरीक्षण करने के दौरान वह भवन के अंदर जाना चाहती थीं। चाबी नहीं मिलने पर उन्होंने अलग से ताला लगवा दिया, ताकि संबंधित लोगों के आने पर पता चल सके कि भवन में ताला किसने लगाया है। उन्होंने कहा कि भवन की चाबी लिखित रूप से सौंपने की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी, ताकि रामलीला के बाद भवन का इस्तेमाल असामाजिक गतिविधियों के लिए न हो। ईओ के मुताबिक, पहले भी भवन में शराब की बोतलें मिलने की सूचना मिली थी। विवाद के बाद ताला खोलने के लिए भेजा गया कर्मी कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि भवन के अंदर क्या है, इसकी लिखित जानकारी लेने के बाद ताला खोलने की बात कही गई थी। विवाद सामने आने के बाद उन्होंने कर्मी को ताला खोलने के लिए भेज दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भवन आगे भी सार्वजनिक कार्यों के लिए खुला रहेगा और रामलीला बाधित करने का उनका इरादा नहीं था। फिलहाल विवाद के केंद्र में भवन के सार्वजनिक इस्तेमाल और 1925 से चली आ रही रामलीला की परंपरा के बीच तालमेल का सवाल है। एक ओर ईओ भवन के रखरखाव और सार्वजनिक उपयोग की बात कह रही हैं, तो दूसरी ओर स्थानीय लोग रामलीला के बीच तालाबंदी को अनुचित मान रहे हैं।