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12h ago हिंदी
एआई गवर्नेंस और डिजिटल फाइनेंस पर वैश्विक नियामक परिदृश्य की पड़ताल
एआई गवर्नेंस और डिजिटल फाइनेंस पर वैश्विक नियामक परिदृश्य की पड़ताल सीसीएसयू में विशेष व्याख्यान, ब्राजील के विशेषज्ञ ने भारत सहित विभिन्न देशों के नियामक ढांचे पर की चर्चा मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संस्थान में मंगलवार को ‘ग्लोबल रेगुलेटरी लैंडस्केप-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गवर्नेंस एंड डिजिटल फाइनेंस: ड्राफ्ट बिल नंबर 4/2025 के तहत ब्राजीलियाई दृष्टिकोण’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। व्याख्यान ब्राजील के इटाउना विश्वविद्यालय के प्रो. (डॉ.) डेलटिन रिबेरो ने दिया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला के नेतृत्व में आयोजित हुआ। डॉ. विवेक कुमार ने प्रो. डेलटिन रिबेरो का परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने विभिन्न देशों के प्रमुख विधि विशेषज्ञों के साथ प्रो. रिबेरो की अकादमिक यात्रा तथा संवैधानिक विधि, तकनीक एवं विधि और मूल अधिकारों के क्षेत्र में उनके शोध एवं प्रकाशित कार्यों की जानकारी दी। व्याख्यान में प्रो. रिबेरो ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने डिजिटल भुगतान, ऋण वितरण, क्रेडिट स्कोरिंग, बीमा, धोखाधड़ी की पहचान, निवेश सेवाओं और ग्राहक सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से बदलाव किया है। उन्होंने कहा कि एआई उन व्यक्तियों और छोटे व्यवसायों को भी वित्तीय सेवाओं से जोड़ने में मदद कर सकता है, जिनका पारंपरिक क्रेडिट इतिहास उपलब्ध नहीं है। हालांकि, उन्होंने एआई के साथ जुड़े जोखिमों पर भी विस्तार से चर्चा की। इनमें भेदभावपूर्ण निर्णय, अत्यधिक डेटा संग्रह, पारदर्शिता की कमी, साइबर सुरक्षा संबंधी खतरे, डीपफेक धोखाधड़ी और बाहरी तकनीकी प्रदाताओं पर अत्यधिक निर्भरता प्रमुख हैं। प्रस्तुति में भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तेजी से विकसित हो रहे फिनटेक क्षेत्र को विशेष रूप से शामिल किया गया। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम-2023, डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम-2025, आरबीआई के डिजिटल लेंडिंग निर्देश-2025, FREE-AI फ्रेमवर्क और इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइंस के संदर्भ में नियामक व्यवस्था की तुलनात्मक चर्चा की गई। यूरोपीय संघ के एआई एक्ट, जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन, डिजिटल ऑपरेशनल रेजिलिएंस एक्ट और मार्केट्स इन क्रिप्टो-एसेट्स रेगुलेशन के माध्यम से यूरोपीय दृष्टिकोण को भी समझाया गया। इसके अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, चीन और सिंगापुर के नियामक विकास तथा OECD, UNESCO, यूरोप की परिषद और बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स के अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों पर भी चर्चा हुई। ब्राजील के दो ड्राफ्ट बिलों की भूमिका समझाई प्रो. रिबेरो ने ब्राजील के ड्राफ्ट बिल नंबर 2,338/2023 और ड्राफ्ट बिल नंबर 4/2025 के बीच अंतर स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि पहला एआई के लिए क्षैतिज नियामक ढांचा विकसित करने का प्रयास करता है, जिसमें जोखिम वर्गीकरण, गवर्नेंस और नियामक निगरानी शामिल है। वहीं ड्राफ्ट बिल 4/2025 ब्राजीलियाई नागरिक संहिता में व्यापक सुधार का प्रस्ताव करता है और व्यक्तित्व अधिकार, स्वचालित निर्णय, नागरिक दायित्व, सिंथेटिक चित्र, डिजिटल संपत्ति, डिजिटल अनुबंध तथा स्मार्ट अनुबंध जैसे विषयों को निजी कानून के दृष्टिकोण से संबोधित करता है। दोनों प्रस्तावों को उन्होंने स्वतंत्र लेकिन पूरक बताया। व्याख्यान में डिजिटल ऋण आवेदन को बिना उचित स्पष्टीकरण खारिज किए जाने, डीपफेक आवाज के जरिए धोखाधड़ी वाले लेनदेन को मंजूरी देने, भेदभावपूर्ण क्रेडिट स्कोरिंग और गलत जानकारी के आधार पर स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट द्वारा संपार्श्विक हस्तांतरित किए जाने जैसे व्यावहारिक उदाहरण भी प्रस्तुत किए गए। समापन पर प्रो. रिबेरो ने कहा कि नवाचार और मौलिक अधिकारों को एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। वित्तीय संस्थानों को अपनी एआई प्रणालियों की पहचान, जोखिम वर्गीकरण, दस्तावेजीकरण और निरंतर निगरानी के साथ जवाबदेही की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने भारत, ब्राजील और ग्लोबल साउथ के अन्य देशों के लिए मानव गरिमा, समावेशन, तकनीकी विकास और संस्थागत जवाबदेही पर आधारित नियामक मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेष व्याख्यान से विद्यार्थियों, शोधार्थियों और कानूनी पेशेवरों को एआई, डिजिटल फाइनेंस और कानून के बदलते संबंधों को वैश्विक एवं तुलनात्मक दृष्टिकोण से समझने का अवसर मिला। साथ ही सीसीएसयू और ब्राजील के इटाउना विश्वविद्यालय के बीच अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संवाद को भी मजबूती मिली।