उदयपुर में आगामी दिनों में होने वाले नगर निगम से लेकर पंचायतीराज के चुनावों में चुनाव ड्यूटी से नाम कटवाने को लेकर प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। अब केवल स्वास्थ्य खराब होने का कारण बताकर चुनाव ड्यूटी कैंसिल कराना आसान नहीं होगा। मेडिकल कारणों से ड्यूटी से छूट मांगने वाले सरकारी कर्मचारियों को मेडिकल बोर्ड के पास जांच के लिए जाना होगा। बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर ही ड्यूटी से छूट देने पर फैसला किया जाएगा। उदयपुर जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने बताया कि जिन अधिग्रहित कार्मिकों के स्वास्थ्य संबंधी कारणों से चुनाव ड्यूटी से मुक्त करने के प्रार्थना पत्र पर महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय, उदयपुर में मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा। जानें मेडिकल बोर्ड गठन की प्रक्रिया चिकित्सालय प्रशासन के अनुसार, चुनाव ड्यूटी से मुक्त किए जाने के लिए कार्मिकों को प्रार्थना पत्र के साथ उपचार से संबंधित समस्त दस्तावेज और आधार कार्ड की कॉपी पेश करनी होगी। सामान्य शाखा, अधीक्षक कार्यालय, महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय के कमरा संख्या 4 में दस्तावेज जमा करवाने होंगे। ऐसे तय होगा दिन न्यूरोलॉजी की समस्या वाले कार्मिकों के लिए सोमवार या गुरुवार और न्यूरोसर्जरी संबंधी समस्या वाले कार्मिकों के लिए मंगलवार या शुक्रवार को मेडिकल बोर्ड गठन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अन्य बीमारियों से संबंधित कार्मिक किसी भी कार्य दिवस में सुबह 10 बजे उपस्थित होकर मेडिकल बोर्ड का गठन करवा सकेंगे। मेडिकल बोर्ड का गठन अस्पताल की ओपीडी में उपलब्ध संबंधित स्पेशलिस्ट डॉक्टर्स की उपलब्धता के अनुसार किया जाएगा। चुनावी पेम्फलेट-पोस्टर के मुद्रण में नियमों की पालना जरूरी इधर, आगामी नगरीय निकाय चुनावों के मद्देनजर चुनावी प्रचार सामग्री के मुद्रण को लेकर निर्धारित प्रावधानों की पालना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मंगलवार को उदयपुर के अतिरिक्त जिला कलेक्टर (शहर) जितेंद्र ओझा के सानिध्य में कलेक्ट्रेट मिनी सभागार में शहर के प्रिंटिंग प्रेस प्रतिनिधियों की बैठक आयोजित हुई। बैठक में एडीएम सिटी ने विभिन्न मुद्रक एवं प्रिंटिंग प्रेस प्रतिनिधियों को चुनावी पुस्तिकाओं, पेम्फलेट, पोस्टर और अन्य प्रचार सामग्री के मुद्रण से संबंधित वैधानिक प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। एडीएम ने कहा कि चुनावी पुस्तिका अथवा पोस्टर के मुद्रण से पूर्व मुद्रक द्वारा प्रकाशक से निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप हस्ताक्षरित घोषणा-पत्र (डिक्लेरेशन) प्राप्त करना आवश्यक है। घोषणा-पत्र में प्रकाशक की पहचान एवं जिम्मेदारी से संबंधित आवश्यक विवरण दर्ज होंगे। एडीएम ओझा ने बताया कि धारा 127-क अथवा निर्वाचन आयोग के निर्देशों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार 6 माह का कारावास अथवा 2 हजार रुपए जुर्माना वसूलने की कार्रवाई की जाएगी।
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