नाटक की शोकांतिका है कि दर्शक को ताली बजाने के अलावा अपनी भूमिका नज़र नहीं आती। शोकांतिका के जिम्मेदार हैं स्वयं नाटक वाले ! क्योंकि नाटक वाले सत्ता के चक्रव्यूह को भेद नहीं पाए। सत्ता ने उन्हें ताली बजाने के अलावा दर्शक की भूमिका को समझने ही नहीं दिया । सत्ता( सामाजिक, राजनैतिक,आर्थिक,धार्मिक,सांस्कृतिक सत्ता ) […]
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