LIVE Public of India  •  Pan-India Citizen Newsroom  •  Verified Reporting
support@publicofindia.in Membership
BREAKING
Submit your story — verified, policy-led, privacy-first publishing Hindi & English news updated every 15 minutes from across India Members get priority review, profile badge & creator dashboard Public of India is a private platform — not a government website Submit your story — verified, policy-led, privacy-first publishing Hindi & English news updated every 15 minutes from across India Members get priority review, profile badge & creator dashboard Public of India is a private platform — not a government website
Home  /  POLITICS  /  Raipur Police के खिलाफ ईसाई संगठन का मोर्चा, दु...
POLITICS Verified हिंदी

Raipur Police के खिलाफ ईसाई संगठन का मोर्चा, दुर्व्यवहार के आरोप में कार्रवाई की मांग

India 13h ago Source: publicofindia

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक ईसाई संगठन ने पुलिस थाने में प्रदर्शन के दौरान समुदाय के सदस्यों के साथ कथित दुर्व्यवहार और उन्हें डराने-धमकाने के आरोप में दो पुलिस अधिकारियों और एक महिला कांस्टेबल को निलंबित करने की मांग की है। वहीं, एक अन्य ईसाई संगठन ने पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया है। उरला थाने के प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) रोहित मालेकर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह कथित तौर पर खमतराई थाने में ईसाई समुदाय के सदस्यों के प्रदर्शन के दौरान एक व्यक्ति को उन्हें छूने से मना करते और चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। पुलिस के अनुसार, यह कथित घटना 21 और 22 अगस्त की दरम्यानी रात की है। खमतराई थाना क्षेत्र के एक घर से पुलिस ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद यह कार्रवाई की थी। कार्यकर्ताओं ने महिलाओं पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया था। गिरफ्तारी के बाद ईसाई समुदाय के सदस्य तीनों महिलाओं की रिहाई और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने के लिए खमतराई थाने पहुंचे थे। अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मालेकर को खमतराई थाने में तैनात किया गया था। सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) पूर्णिमा लामा भी वहां मौजूद थीं। वायरल वीडियो में एक व्यक्ति मालेकर की ओर बढ़ता दिखाई देता है। इसके बाद मालेकर उसे यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि उनके शरीर को नहीं छूना चाहिए। वह व्यक्ति को उन्हें छूने पर चेतावनी देते हुए भी सुनाई देते हैं। मालेकर के पीछे खड़ी एक महिला पुलिसकर्मी भी व्यक्ति से कहती सुनाई देती है कि वह अधिकारी को नहीं छू सकता। इस पर व्यक्ति कहता सुनाई देता है कि उसने अधिकारी को छुआ ही नहीं है। वीडियो सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ साझा किया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान अधिकारी ईसाई समुदाय के सदस्यों को डरा-धमका रहे थे। राज्य के संयुक्त मसीह समाज के अध्यक्ष प्रभाकर सोनी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान लामा, मालेकर और एक अन्य महिला पुलिसकर्मी ने समुदाय के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। सोनी ने पीटीआई-से कहा, ‘‘हमने रायपुर के उत्तर क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त को शिकायत देकर एसीपी पूर्णिमा लामा, निरीक्षक रोहित मालेकर और एक महिला कांस्टेबल को निलंबित करने की मांग की है।’’ सोनी ने आरोप लगाया कि एक घर में प्रार्थना कर रहीं 26 महिलाओं को ‘‘झूठे आरोपों’’ के आधार पर थाने लाया गया और इनमें से तीन के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उचित सत्यापन के बिना उन्हें जेल भेज दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब समुदाय के सदस्य महिलाओं की गिरफ्तारी और हिरासत के बारे में पुलिस से सवाल करने थाने पहुंचे तो एसीपी, निरीक्षक और एक अन्य महिला पुलिसकर्मी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। सोनी ने आरोप लगाया, ‘‘मालेकर ने हमसे कहा कि मुझे मत छुओ, हमें धमकाया और हमारे साथ अहंकारपूर्ण व्यवहार किया।’’ उन्होंने कहा कि संगठन ने 28 अगस्त तक तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित करने की मांग की है और गिरफ्तार तीन महिलाओं के खिलाफ दर्ज मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। सोनी ने चेतावनी दी कि यदि कोई कार्रवाई नहीं की गई तो समुदाय के सदस्य 29 अगस्त को रायपुर पुलिस आयुक्त कार्यालय का घेराव करेंगे। हालांकि, रायपुर के पुलिस आयुक्त संजीव शुक्ला ने कहा कि घटना के संबंध में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ अभी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। इस बीच, प्रगतिशील क्रिश्चियन एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष प्रदीप बोगी ने मालेकर का समर्थन करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारी अपना कर्तव्य निभा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने में कुछ लोग हंगामा कर रहे थे और दावा किया कि प्रदर्शन करने वाले लोग मूल रूप से ईसाई नहीं थे। बोगी ने कहा, ‘‘पुलिसकर्मी अपना कर्तव्य निभा रहे थे और थाने में मौजूद लोग हंगामा कर रहे थे।’’ उन्होंने कहा कि लोगों के धार्मिक पहचान से जुड़े दावों की पुलिस को जांच करनी चाहिए।

This is a summary. For the full story, refer to the original source. Public of India presents verified citizen-relevant reporting.