हाथरस में जन्म प्रमाण पत्रों के रजिस्ट्रेशन में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। प्रकरण में डिप्टी सीएमओ एमआई आलम ने बुधवार देर शाम हाथरस जंक्शन कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। मामला सीएचसी महौ में सामने आई कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। भ्रष्टाचार और अनैतिक वसूली की शिकायत पर हुई जांच मामला ग्राम महौं निवासी मनोज कुमार की शिकायत के बाद सामने आया। मनोज कुमार ने सीएचसी महौ में भ्रष्टाचार और अनैतिक वसूली का आरोप लगाते हुए सीएमओ हाथरस को शिकायत दी थी। शिकायत के बाद सीएमओ ने प्रकरण की जांच के लिए एक समिति गठित की। समिति ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट अधिकारियों को सौंपी। निजी व्यक्ति और डाटा एंट्री ऑपरेटर कर रहे थे रजिस्ट्रेशन जांच में सामने आया कि सीएचसी महौ में जन्म-मृत्यु पंजीकरण का काम मोहित कुमार नामक निजी व्यक्ति और डाटा एंट्री ऑपरेटर गौरव कुमार द्वारा किया जा रहा था। शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए जन्म प्रमाण पत्रों की सीआरएस पोर्टल पर जांच की गई। इस दौरान कई प्रमाण पत्रों में गंभीर विसंगतियां मिलीं। एक जन्म प्रमाण पत्र की पंजीकरण संख्या बी-20179-56213-000076 है। इसमें पंजीकरण की तारीख 8 जुलाई 2017 और जन्म तिथि 1 मई 2017 दर्ज है। जांच में यह प्रमाण पत्र 13 अगस्त 2026 को अपलोड किया गया पाया गया। इसके साथ सुरभि का प्रसव प्रमाण पत्र भी संलग्न था, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार सुरभि का प्रसव 2 अगस्त 2025 को हुआ था। एक ही प्रसव प्रमाण पत्र अलग प्रमाण पत्रों में लगा मिला इसी तरह नंदनी की जन्म तिथि 25 जनवरी 2017 वाले प्रमाण पत्र की पंजीकरण संख्या बी-20179-56200-000057 है। इसका पंजीकरण 20 दिसंबर 2017 को दर्ज है, लेकिन जांच में इसे भी 13 अगस्त 2026 को जारी किया गया दिखाया गया। इसके साथ सुरभि का प्रसव प्रमाण पत्र संख्या 36506 अपलोड पाया गया। एक महिला के दो बच्चों के जन्म में महज तीन महीने का अंतर जांच में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया। गीता देवी के नाम से दो बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए। इनमें अरुण कुमार गौतम की जन्म तिथि 1 मई 2017 और हिमांशु गौतम की जन्म तिथि 1 अगस्त 2017 दर्ज है। दोनों प्रमाण पत्रों में मां का नाम गीता देवी दर्ज है और प्रमाण पत्र 8 जुलाई 2026 को जारी किए गए दिखाए गए। जांच समिति ने इसे गंभीर विसंगति माना है। रिपोर्ट में कहा गया कि एक ही महिला के दो बच्चों का जन्म महज तीन महीने के अंतराल में होना संभव नहीं है। लाडपुर और देवीनगर के जन्मों का भी महौ से पंजीकरण जांच में यह भी सामने आया कि पीएचसी लाडपुर और देवीनगर में हुए जन्मों का पंजीकरण वहां के रजिस्ट्रार यानी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी द्वारा नहीं किया जा रहा था। इसके बजाय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महौ की ओर से अपनी मुहर लगाकर इन जन्मों का पंजीकरण किया जा रहा था। जांच समिति ने इसे नियमों का उल्लंघन माना है। पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा, जांच शुरू जांच रिपोर्ट के आधार पर डिप्टी सीएमओ एमआई आलम ने हाथरस जंक्शन कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब जांच के दौरान जन्म प्रमाण पत्रों के रिकॉर्ड, सीआरएस पोर्टल पर दर्ज विवरण और पंजीकरण प्रक्रिया से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी।
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