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Indian Navy को मिला तीसरा एंटी-सबमरीन युद्धपोत ‘मंगरोल’, क्या हैं फीचर्स? क्षमता और सेना के लिए क्यों है जरूरी

India 13h ago Source: publicofindia

Anti-Submarine Mangrol: भारतीय नौसेना के खेमें में अब एक नया युद्धपोत जुड़ गया है. कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने भारतीय नौसेना को मंगरोल सौंप दिया है, जो स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC) श्रृंखला का तीसरा जहाज है‘. मंगरोल इस कैटेगरी का CSL की ओर से बनाया गया तीसरा पोत है. इसे बनाने के लिए 80 प्रतिशत से ज्यादा की समामग्री स्वदेशी इस्तेमाल की गई है. मंगरोल को लेकर फिलहाल देश में चर्चा काफी तेज है. इसे तटीय इलाकों में पनडुब्बियों की निगरानी और उनसे निपटने के लिए तैयार किया गया है. इसके मिल जाने से माना जा रहा है कि अब भारतीय नौसेना का काम आसान हो सकेगा. यह पोत कोच्चि में 21 अगस्त 2026 को डिलीवर किया गया है. क्या है मंगरोल? बात करें अगर मंगरोल की तो यह एक प्रकार का Anti-Submarine Warfare Shallow Water Craft है. आसान भाषा में समझें तो यह ऐसा खास युद्धपोत है, जिसे खासतौर पर समुद्र के तटीय और कम गहराई वाले हिस्सों में पनडुब्बियों के साथ-साथ पानी के अंदर मौजूद खतरों का पता लगाने और उनसे निपटने के लिए डिजाइन किया गया है. सरकारी जानकारी के अनुसार इन पोतों का उद्देश्य तटीय इलाकों में sub-surface surveillance बढ़ाना और पानी के अंदर के खतरे को पता लगाकर उन्हें न्यूट्रेलाइज करने की क्षमता उपलब्ध कराना है. क्या हैं मंगरोल के फीचर्स? मंगरोल कई फीचर्स से लैस है, जिसमें 25 knots के साथ-साथ 1,800 nautical miles तक जाने की क्षमता है. इसमें 57 लोगों के बैठने की क्रू कैपेसिटी भी है, जो इसे अपने आप में अन्य से काफी अलग बनाती है. मंगरोल 78 मीटर लंबा पोत है और इसे डीजल इंजन-वॉटरजेट प्रोपल्शन प्रणाली से शक्ति मिलती है. इस पोत में शैलो-वाटर सोनार, हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी ASW रॉकेट और माइन-लेइंग उपकरण लगाए गए हैं, जिससे यह पानी के भीतर मौजूद खतरों का जवाब देने में सक्षम बनता है. मंगरोल को सिर्फ निगरानी के लिए नहीं बनाया गया है, जो पानी के नीचे किसी hostile submarine को पहचान लेती है. यह Low-Intensity Maritime Operations में भी काम आएगा. यह पोत operational speed पर यह काफी लंबी दूरी तक समुद्री मिशन कर सकता है. भारतीय नौसेना के लिए क्यों होगा जरूरी? भारत की लंबी समुद्री सीमा और हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक गतिविधियों को देखते हुए underwater surveillance है. भारतीय नौसेना को पानी के अंदर निगरानी के लिए एक ऐसा पोत चाहिए होता है, जो पानी के अंदर होने वाले खतरे का संकेत दे सके. ऐसे से में मंगरोल पोत सेना के लिए काफी उपयोगी इसलिए हो सकता है क्योंकि इस पोत में कई मजबूत तकनीकें और फीचर्स भी दिए गए हैं.

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