मथुरा में शुक्रवार को शाम करीब 4 बजे डैंपियर नगर स्थित पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह में एक दिवसीय जिला स्तरीय पंच सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में ग्रामीण रोजगार, आजीविका संवर्धन और गांवों के समग्र विकास पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, माल्यार्पण और पुष्पार्पण के साथ हुआ। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी, विधायक बलदेव पूरन प्रकाश सहित अन्य जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया। मुख्य विकास अधिकारी डॉ. पूजा गुप्ता और उपायुक्त श्रम एवं रोजगार विजय कुमार पाण्डेय भी उपस्थित रहे। परिकल्पना के अनुरूप आगे बढ़ाना सम्मेलन में ग्राम पंचायतों की समग्र कार्ययोजनाओं के निर्माण, ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड के पारदर्शी प्रबंधन, टिकाऊ सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देने और समयबद्ध मजदूरी भुगतान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि अधिनियम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार की वैधानिक गारंटी देना है। साथ ही, उत्पादक ग्रामीण परिसंपत्तियों का निर्माण कर गांवों को विकसित भारत @2047 की परिकल्पना के अनुरूप आगे बढ़ाना है। उन्होंने जानकारी दी कि अधिनियम के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के वैतनिक रोजगार की गारंटी दी गई है, जो पूर्व के मनरेगा के 100 दिनों से अधिक है। यह अधिनियम 1 जुलाई 2026 से देश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू हुआ है। जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि कार्यों में बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, रियल-टाइम मोबाइल ऐप मॉनिटरिंग और डीबीटी से भुगतान अनिवार्य है। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक अथवा अधिकतम 15 दिन में किया जाएगा। कार्य जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका अवसंरचना और मौसम प्रतिकूलता से निपटने जैसे चार प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होंगे। इस सम्मेलन में जनप्रतिनिधियों, बीडीओ, एडीओ, ग्राम पंचायत सचिवों और ग्राम पंचायत प्रशासकों सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। मंच संचालन बीडीओ मांट अभिमन्यु सेठ ने किया।
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