मीना कुमारी angara(ranchi) "लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती..." इस कहावत को रांची के सुदूर ग्रामीण इलाके की प्रतिभावान तीरंदाज मीना कुमारी ने सच कर दिखाया है। अभावों और चुनौतियों से जूझते हुए मीना का चयन खेल कोटे से असम राइफल में हुआ है। वह आगामी 5 सितंबर 2026 को असम राइफल में अपनी सेवाएं देना शुरू करेंगी। पिता का साया उठा, पर नहीं खोया हौसला मीना कुमारी के जीवन का सफर आसान नहीं रहा। जब वह बहुत छोटी थीं, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। घर में मां, एक बड़े भाई और सबसे छोटी मीना के सामने आर्थिक तंगहाली की बड़ी चुनौती थी। इसके बावजूद मीना ने हार नहीं मानी और करीब 8 साल पहले तीरंदाजी की दुनिया में कदम रखा। अभ्यास के लिए मीना रोज अपने घर टाटी नवाडीह से जोन्हा स्थित ट्रेनिंग सेंटर तक 4 किलोमीटर पैदल या साइकिल से आती थीं और शाम को वापस लौटती थीं। रोजाना 8 किलोमीटर का यह सफर उनके बुलंद हौसलों को डिगा नहीं सका। राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड का मान बढ़ाया कोच रोहित कोइरी के कुशल मार्गदर्शन में मीना ने अपनी धारदार तीरंदाजी से कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया और झारखंड के लिए मेडल जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। मीना की इस सफलता ने साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ और मेहनत निरंतर हो, तो मंजिल मिल ही जाती है। जोन्हा की माटी से देश सेवा की परंपरा जोन्हा का तीरंदाजी केंद्र लगातार देश को बेहतरीन खिलाड़ी दे रहा है। कोच रोहित कोइरी की देखरेख में इससे पहले भी कई तीरंदाजों को खेल कोटे से सरकारी नौकरियां मिल चुकी हैं। इनमें दीप्ति कुमारी (भारतीय रेलवे), महेश बड़ाईक (भारतीय सेना), अंकिता कुमारी (बीएसएफ) और सावित्री कुमारी (असम राइफल) शामिल हैं। अब मीना कुमारी का चयन इस क्षेत्र के अन्य ग्रामीण युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बना है।
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