नगर निगम में विकास कार्यों की मंजूरी को लेकर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के प्रस्तावों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। निगम के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भाजपा पार्षदों की ओर से भेजे गए 785 प्रस्तावों में से 642 को मंजूरी मिली, जबकि कांग्रेस पार्षदों के 285 प्रस्तावों में सिर्फ 30 काम ही स्वीकृत हुए। यानी भाजपा के प्रस्तावों की मंजूरी दर करीब 82%, जबकि कांग्रेस के प्रस्तावों की मंजूरी दर सिर्फ 11% रही। कुछ पार्षदों ने भेजे 30 से 60 प्रस्ताव निगम के उपलब्ध आंकड़ों में अलग-अलग पार्षदों की ओर से भेजे गए प्रस्तावों की संख्या में भी अंतर है। कुछ पार्षदों ने 30 से 60 तक विकास कार्यों के प्रस्ताव भेजे हैं, लेकिन उनमें स्वीकृत कामों की संख्या काफी कम रही। 1070 प्रस्तावों में 672 काम मंजूर निगम के आंकड़ों के मुताबिक दोनों दलों के पार्षदों ने कुल 1070 विकास कार्यों के प्रस्ताव भेजे थे। इनमें से 672 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। भाजपा के 5 में से 4 प्रस्ताव मंजूर भाजपा पार्षदों के 785 प्रस्तावों में से 642 स्वीकृत हुए। यानी हर 5 में करीब 4 प्रस्तावों को मंजूरी मिली। सिर्फ 143 प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हुए। इसके मुकाबले कांग्रेस पार्षदों के 285 प्रस्तावों में से 255 प्रस्ताव मंजूर नहीं हुए। सिर्फ 30 प्रस्ताव ही पास हो सके। कांग्रेस के प्रस्तावों की मंजूरी दर 11% से भी कम आंकड़ों के हिसाब से कांग्रेस पार्षदों की मंजूरी दर 10.5% बैठती है। यानी करीब 9 प्रस्तावों में सिर्फ 1 प्रस्ताव को मंजूरी मिली। भाजपा और कांग्रेस के बीच सिर्फ प्रस्तावों की संख्या में ही अंतर नहीं है, बल्कि मंजूरी के अनुपात में भी बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। कांग्रेस बोली- भेदभाव की राजनीति चल रही कांग्रेस जिलाध्यक्ष और पार्षद श्रीकुमार मेनन ने निगम के आंकड़ों को लेकर भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, "कहने को तो नौ इंजन की सरकार है, लेकिन रायपुर के 70 वार्डों में काम हो नहीं रहे हैं। भाजपा पार्षदों के 82 प्रतिशत काम हो रहे हैं, जबकि कांग्रेस पार्षदों के सिर्फ 11 प्रतिशत काम हो रहे हैं।" मेनन ने आरोप लगाया कि निगम में भेदभाव की राजनीति चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा पार्षदों के वार्डों में काम मंजूर होने के बावजूद जमीनी हालात ज्यादा खराब हैं। महापौर बोलीं- भेदभाव जैसी कोई बात नहीं रायपुर महापौर मीनल चौबे ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि भेदभाव जैसी कोई बात नहीं है। किसी भी पार्टी के पार्षद हों, जनहित के सभी कामों को मंजूरी दी जा रही है। महापौर के मुताबिक कामों की स्वीकृति पार्टी के आधार पर नहीं, बल्कि जनहित और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जा रही है।
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