फिलहाल यह फीचर सीमित बीटा रोलआउट में उपलब्ध कराया जा रहा है. इसका ऑन-डिवाइस मॉडल खास है, क्योंकि इससे स्कैम की पहचान करने के लिए यूजर की निजी बातचीत को सर्वर पर भेजने की जरूरत नहीं पड़ती. यह तरीका भविष्य में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के सामने मौजूद उस चुनौती का समाधान करने में मदद कर सकता है, जिसमें यूजर की सुरक्षा और उसकी प्राइवेसी दोनों को एक साथ बनाए रखना जरूरी है.
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