पीलीभीत में करोड़ों रुपए के वेतन घोटाले के मुख्य आरोपी इल्हाम उर्रहमान शम्सी की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति ने गुरुवार को बैठक कर सर्वसम्मति से इल्हाम को बर्खास्त करने का प्रस्ताव पारित किया। निर्णय की प्रति जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय भेज दी गई है। शासन स्तर से उप शिक्षा निदेशक, बरेली मंडल को भी प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं। आठ साल से डीआईओएस कार्यालय में कर रहा था काम इल्हाम बीसलपुर स्थित जनता टेक्निकल इंटर कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यानी चपरासी के पद पर तैनात था। आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से वह करीब आठ साल से डीआईओएस कार्यालय में अनधिकृत रूप से बाबू का काम कर रहा था। उस पर वेतन टोकन जारी करने की आड़ में सरकारी धन के गबन का आरोप है। मामले की जांच के दौरान घोटाले में कई लोगों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है। पत्नी के खाते में एक करोड़ से ज्यादा जमा होने पर खुला मामला घोटाले का खुलासा दिसंबर में हुआ था। बैंक ने इल्हाम की पत्नी अर्शी के खाते में एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा होने के बाद खाता फ्रीज कर दिया था। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई। जांच के बाद तत्कालीन डीआईओएस ने 13 फरवरी को इल्हाम और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिला मामले में कॉलेज की प्रबंध समिति ने इल्हाम को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। बताया गया कि नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिला। 31 जुलाई को जवाब देने की समय सीमा भी समाप्त हो गई। इसके बाद प्रबंध समिति ने विधिक राय लेने के बाद गुरुवार को बैठक कर इल्हाम की सेवाएं समाप्त करने का फैसला लिया। वित्त एवं लेखाधिकारी से भी पूछताछ मामले की पुलिस जांच अब अंतिम चरण में बताई जा रही है। पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने डीआईओएस कार्यालय के वित्त एवं लेखाधिकारी इंद्रेश कुमार से भी पूछताछ की है। पुलिस इस मामले में इल्हाम की तीन पत्नियों समेत कई रिश्तेदारों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। 200 करोड़ की संदिग्ध संपत्तियां चिन्हित पुलिस जांच में गबन की रकम से कई जिलों में संपत्तियां खरीदे जाने की बात सामने आई है। पीलीभीत, बरेली, संभल, मुरादाबाद, चंदौसी, गाजियाबाद और बुलंदशहर में जमीन, मकान और प्लॉट समेत करीब 200 करोड़ रुपये की संदिग्ध संपत्तियां चिन्हित किए जाने की बात कही गई है। बताया जा रहा है कि न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद इन संपत्तियों की कुर्की और जब्ती की कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट जाने की चर्चा इल्हाम के बर्खास्तगी के फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि वह बर्खास्तगी का लिखित आदेश नहीं मिलने को आधार बनाकर कानूनी चुनौती दे सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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