गोरखपुर की दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी के शिक्षक अपने वीसी के समर्थन में आगे आए हैं। 12 अगस्त को हुए हंगामे के दौरान कुलपति प्रो. पूनम टंडन के साथ कथित तौर पर अमर्यादित व्यवहार किया गया। इस घटना के विरोध में यूनिवर्सिटी के 250 से अधिक शिक्षक पूरी तरह एकजुट हो गए। उन्होंने घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। गुरुवार को दोपहर करीब 12 बजे इसी संबंध में कुछ मांग को लेकर शिक्षकों ने SDM को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ वैधानिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। वीसी और सुरक्षाकर्मियों के साथ हाथापाई का आरोप ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 'गुआक्टा' (महाविद्यालयीय शिक्षक संघ) से जुड़े शिक्षकों और पदाधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान वीसी के साथ अभद्रता की। उनके साथ हाथापाई की कोशिश हुई और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया गया। साथ ही वीसी की सुरक्षा में तैनात गार्डों से भी धक्का-मुक्की की गई। इसके बाद वीसी की गाड़ी रोके जाने के कारण उन्हें पैदल ही अपने आवास तक जाना पड़ा। शिक्षकों ने इसे संस्था की गरिमा के खिलाफ बताया। प्रोफेसर, कर्मचारी और पूर्व वीसी भी समर्थन में आए वीसी के समर्थन में यूनिवर्सिटी के 250 से ज्यादा प्रोफेसर, संकायाध्यक्ष (डीन), विभागाध्यक्ष, कर्मचारी, रिटायर्ड शिक्षक और पूर्व वीसी भी आगे आए। प्रमुख रूप से प्रो. वीसी प्रो. शांतनु रस्तोगी, डीएसडब्ल्यू प्रो. अजय शुक्ला और प्रो. रजनीकांत पांडेय मौजूद रहे। कर्मचारियों और शिक्षकों ने वीसी दफ्तर तक मार्च निकालकर प्रो. पूनम टंडन से मुलाकात की और उनके प्रति अपना समर्थन जताया। स्ववित्तपोषित कॉलेजों ने भी जताया भरोसा स्ववित्तपोषित (सेल्फ फाइनेंस) कॉलेजों के प्रतिनिधियों ने भी वीसी का पक्ष लिया। उन्होंने कहा कि प्रो. पूनम टंडन ने उनके हित में कई बड़े फैसले लिए हैं। विरोध के नाम पर मर्यादित व्यवहार का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संवाद से हल निकालें, मर्यादा न भूलें शिक्षकों, कर्मचारियों और पूर्व कुलपतियों ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध प्रदर्शन का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके लिए मर्यादा और यूनिवर्सिटी की प्रतिष्ठा से समझौता नहीं किया जा सकता। किसी भी मुद्दे को सुलझाने के लिए बातचीत के रास्ते हमेशा खुले हैं।
This is a summary. For the full story, refer to the original source. Public of India presents verified citizen-relevant reporting.