बदायूं के भगवान नीलकंठ महादेव बनाम जामा मस्जिद मामले में मंगलवार को कोर्ट में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बहस हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अगली तारीख 13 अगस्त तय की है। उस दिन सुबह 10:30 बजे से मामले की सुनवाई होगी। जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी की ओर से अधिवक्ता अनवर आलम और असरार अहमद कोर्ट में मौजूद रहे। वहीं नीलकंठ महादेव पक्ष से अधिवक्ता वेदप्रकाश साहू, नंदकिशोर गुप्ता, प्रेम स्वरूप वैश्य और विवेक रेंडर ने पैरवी की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला नीलकंठ महादेव पक्ष के अधिवक्ता वेदप्रकाश साहू के मुताबिक, बहस के दौरान इंतजामिया कमेटी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए मामले की सुनवाई पर रोक लगाने की मांग की। इसके जवाब में हिंदू पक्ष ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में इस मामले की पोषणीयता यानी सुनवाई योग्य होने को लेकर कोई निर्देश नहीं है।इस पर कोर्ट ने इंतजामिया कमेटी को सुप्रीम कोर्ट का लिखित आदेश पेश करने का निर्देश दिया है। मुस्लिम पक्ष ने सुनवाई रोकने के लिए दिया आवेदन इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ता असरार अहमद ने बताया कि उनकी ओर से कोर्ट में आवेदन देकर मामले की सुनवाई रोकने का अनुरोध किया गया है। उनका तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश अभी प्रभावी है और उसके तहत निचली अदालतों में इस तरह के मामलों की सुनवाई नहीं की जा सकती। 2022 में कोर्ट पहुंचा था मामला यह मामला वर्ष 2022 में न्यायालय पहुंचा था। अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश पटेल इस मुकदमे के मुख्य वादी हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि वर्तमान जामा मस्जिद परिसर में पहले नीलकंठ महादेव का मंदिर था, जिसे आक्रमणकारियों ने मस्जिद में बदल दिया। हिंदू पक्ष का यह भी दावा है कि वहां से प्राप्त शिवलिंग वर्तमान में शहर के दरीबा मंदिर में स्थापित है। इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट भी पहले न्यायालय में दाखिल की जा चुकी है। मुस्लिम पक्ष का दावा- यहां हमेशा से मस्जिद थी मामले में फिलहाल मुस्लिम पक्ष की ओर से बहस जारी है। इंतजामिया कमेटी का दावा है कि संबंधित स्थान पर हमेशा से मस्जिद ही रही है और वहां किसी मंदिर के अस्तित्व का कोई प्रमाण नहीं है। मुस्लिम पक्ष की ओर से यह भी तर्क दिया जा रहा है कि मामला सुनवाई योग्य नहीं है। अब 13 अगस्त को होने वाली सुनवाई में इंतजामिया कमेटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट का लिखित आदेश पेश किया जाएगा। इसके बाद कोर्ट इस संबंध में आगे की कार्यवाही पर विचार करेगा।
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