सावन के दूसरे सोमवार की शाम नाथ नगरी बरेली शिवभक्ति में डूब गई। श्यामगंज स्थित सेठ गिरधारी लाल मंदिर से बाबा महाकाल की भव्य पालकी यात्रा निकाली गई। चांदी की पालकी में विराजमान बाबा महाकाल नगर भ्रमण पर निकले तो सड़कों पर हजारों शिवभक्त उमड़ पड़े। पूरा मार्ग हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंजता रहा। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर बाबा का स्वागत किया। आरती उतारी और प्रसाद बांटा। बाबा महाकाल पालकी सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में निकली यात्रा से पहले मंदिर परिसर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। पंडित भगवती नंदन शास्त्री और अन्य आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच बाबा महाकाल, माता गौरी और भगवान भैरवनाथ का पूजन कराया। पालकी धारण करने वाले भक्तों को जनेऊ, भस्म, चंदन और रुद्राक्ष की माला धारण कराई गई। इसके बाद ट्रस्ट अध्यक्ष ब्रजवासी लाल अग्रवाल और महामंत्री अनुराग अग्रवाल ने बाबा महाकाल और माता जगतजननी की आरती उतारी। ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के बीच पालकी यात्रा का शुभारंभ हुआ। चांदी की पालकी में विराजे बाबा महाकाल यात्रा में बाबा महाकाल चांदी की भव्य पालकी में विराजमान थे। पालकी पर बारह ज्योतिर्लिंगों की आकृतियां अंकित थीं। बाबा के साथ मां अन्नपूर्णा और काशी के कोतवाल भगवान भैरवनाथ भी अपने-अपने सिंहासनों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले। जैसे ही पालकी यात्रा मुख्य मार्गों पर पहुंची, दोनों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ लग गई। लोग बाबा के दर्शन के लिए काफी देर तक इंतजार करते नजर आए। कई श्रद्धालुओं ने पालकी के सामने आरती की। कुछ जगहों पर भक्तों ने बाबा के जयकारे लगाए और पुष्प बरसाए। छतों से भी हुई पुष्पवर्षा, जगह-जगह सजे स्वागत पंडाल श्यामगंज से शुरू हुई पालकी यात्रा साहू गोपीनाथ, शिवाजी मार्ग, बांस मंडी, सिकलापुर, रोडवेज, चौकी चौराहा, बरेली कॉलेज और कालीबाड़ी होते हुए आगे बढ़ी। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह स्वागत पंडाल लगाए गए थे। विभिन्न समाजों, व्यापारिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने बाबा महाकाल की आरती उतारकर स्वागत किया। श्रद्धालुओं को प्रसाद भी वितरित किया गया। कई स्थानों पर मकानों की छतों से महिलाओं और बच्चों ने पुष्पवर्षा की। यात्रा में नंद, कश्यप, अग्रवाल, राठौर, पासवान, राजपूत, क्षत्रिय, भोजवाल, वाल्मीकि, स्वर्णकार, चित्रांश कायस्थ और गुप्ता समाज समेत विभिन्न वर्गों के लोगों ने सहभागिता की। इससे यात्रा धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक समरसता का भी संदेश देती नजर आई। मंत्री और जनप्रतिनिधियों ने उतारी आरती पालकी यात्रा के दौरान वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार, कैंट विधायक संजीव अग्रवाल, डॉ. विनोद पागरानी समेत कई गणमान्य लोगों ने बाबा महाकाल की आरती उतारी। उन्होंने श्रद्धालुओं और आयोजन समिति का उत्साह बढ़ाया। यात्रा को सफल बनाने में कैंट विधायक संजीव अग्रवाल, पार्षद राजेश अग्रवाल, विशाल मेहरोत्रा, नवीन अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा। धार्मिक और ऐतिहासिक झांकियों ने खींचा ध्यान बाबा महाकाल की पालकी यात्रा में धार्मिक और ऐतिहासिक झांकियां भी शामिल रहीं। वीर हकीकत राय, छत्रपति शिवाजी महाराज और हिंदवी स्वराज की झांकियों ने लोगों का ध्यान खींचा। चित्तौड़ की रानी पद्मिनी के जौहर और बलिदान पर आधारित झांकी भी आकर्षण का केंद्र रही। झांकियों के साथ चल रहे कलाकारों ने इतिहास और धार्मिक प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। नासिक बैंड और डमरू दल की प्रस्तुति ने माहौल को और भक्तिमय बना दिया। श्री रामानुज सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र-छात्राओं का घोष भी यात्रा का आकर्षण रहा। डमरुओं की गूंज और शिवभक्ति के जयकारों के बीच श्रद्धालु आगे बढ़ते रहे। भस्म आरती और दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग से जुड़ी है महाकाल की विशेष पहचान भगवान महाकाल को बारह ज्योतिर्लिंगों में विशेष स्थान प्राप्त है। उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देशभर में प्रसिद्ध है। महाकाल की उपासना में भस्म, रुद्राक्ष और शिवभक्ति का विशेष महत्व माना जाता है। महाकाल को काल पर विजय और वैराग्य के प्रतीक के रूप में भी पूजा जाता है। यही भाव पालकी यात्रा में भी दिखाई दिया। भक्तों के माथे पर भस्म और चंदन था। हाथों में रुद्राक्ष की माला थी। जुबां पर सिर्फ महादेव का नाम था। हजारों शिवभक्त बने यात्रा का हिस्सा सावन के दूसरे सोमवार को निकली इस यात्रा में शहर के अलग-अलग इलाकों से शिवभक्त पहुंचे। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में उत्साह दिखाई दिया। महिलाएं भी बड़ी संख्या में यात्रा में शामिल हुईं। यात्रा जैसे-जैसे आगे बढ़ी, श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई। कहीं आरती हुई तो कहीं पुष्पवर्षा। कई जगहों पर भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। पूरे रास्ते शिवभक्ति के गीत और जयकारे सुनाई देते रहे। मीडिया प्रभारी प्रमोद रघुवंशी ने बताया कि यात्रा को भव्य और व्यवस्थित स्वरूप देने में विवेक मिश्रा, पंकज दत्त, राजकिशोर कश्यप, प्रसून सिंह, अमित मिश्रा, अमित भारद्वाज, मुकुल अग्रवाल, प्रवीण अग्रवाल, अनूप गोयल और नितेश वर्मा समेत अनेक लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई। सावन की शाम निकली बाबा महाकाल की यह पालकी यात्रा नाथ नगरी की धार्मिक परंपरा का भव्य दृश्य बन गई। चांदी की पालकी में विराजमान बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ ने शहर के माहौल को पूरी तरह शिवमय कर दिया। हर तरफ एक ही आवाज सुनाई दे रही थी- हर-हर महादेव।
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