पाकिस्तान मूल की मेरठ में ब्याही सबा फरहत की रिहाई डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन में अटक कर रह गई है। 5 अगस्त को हाईकोर्ट ने 170 दिन बाद सबा फरहत को जमानत दे दी थी। शुक्रवार शाम तक उनके अधिवक्ता ने हाईकोर्ट की डायरेक्शन के अनुसार सभी कागजी प्रक्रिया पूर्ण कर दी। शनिवार शाम तक अगर प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो ठीक वरना सोमवार तक के लिए इंतजार करना होगा। कांवड़ यात्रा चल रही है और सरकारी मशीनरी पूरी तरह व्यस्त है। ऐसे में इस अवधि के बढ़ने की संभावनाओं को भी नकारा नहीं जा सकता है। पहले एक नजर डालिए पूरे मामले पर यह मामला 14 फरवरी, 2026 को मेरठ के देहलीगेट थाना क्षेत्र की कोठी अतानस निवासी रुकसाना खान पत्नी अयाज अहमद की शिकायत पर दर्ज हुआ था। उनके द्वारा आरोप लगाया गया था कि पाकिस्तानी मूल की सबा उर्फ नाजी उर्फ नाजिया और उनकी पुत्री ऐमन फरहत फर्जी दस्तावेजों और पासपोर्ट के आधार पर स्वयं को भारतीय नागरिक दर्शाकर अवैध रूप से मेरठ में रह रही हैं। शिकायत के अनुसार, देहलीगेट की नादिर अली बिल्डिंग निवासी फरहत मसूद ने पाकिस्तान जाकर सबा फरहत से विवाह किया था। विवाह के बाद उनके तीन बच्चे हुए। आरोप था कि वर्ष 1993 में पाकिस्तान में जन्मी बेटी ऐमन फरहत अपनी मां के पासपोर्ट के आधार पर भारत आई और मेरठ के सोफिया स्कूल में पढ़ाई की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ऐमन ने भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं की, बावजूद इसके फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसका भारतीय पासपोर्ट बनवा लिया गया। यह भी आरोप लगाए गए सबा पर सबा फरहत पर दो अलग-अलग नामों से वोटर आईडी बनवाने और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पाकिस्तान सहित अन्य देशों की यात्रा करने के भी आरोप लगाए गए थे। शिकायत में यह भी दावा किया गया था कि सबा के पिता हनीफ अहमद पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े रहे हैं। शिकायत के बाद पुलिस ने सबा फरहत को पूछताछ के लिए बुलाकर गिरफ्तार कर लिया था। निचली अदालत से जमानत हुई खारिज गिरफ्तारी के बाद निचली अदालत में जमानत याचिका डाली गई। जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सबा पक्ष ने कहा था कि उन्होंने कभी वोटर आईडी के लिए आवेदन नहीं किया और न ही कभी विदेश यात्राएं की हैं। उन्होंने इससे जुड़े कुछ साक्ष्य भी कोर्ट के समक्ष पेश किए हालांकि निचली अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया था। मुकदमे से ऐमन आउट और मसूद इन मुकदमे में पहले सबा फरहत और उनकी बेटी ऐमन फरहत को नामजद किया गया था, लेकिन बाद में ऐमन का नाम हटा दिया गया। इसके बाद पुलिस ने सबा के पति मसूद फरहत को आरोपी बनाया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने पाकिस्तान में जन्मी बेटी का मेरठ के एक निजी अस्पताल से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया था। जांच के दौरान पुलिस ने मुकदमे में विदेशी अधिनियम की धारा 14-ख भी जोड़ दी। क्रमवार जानिए सबा पक्ष की दलीलों को - निचली अदालत से राहत नहीं मिलने पर सबा फरहत ने हाईकोर्ट का रुख किया। उनकी ओर से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 318(4), 336, 338, 340(2), 351(2), 352, 61(2) तथा विदेशी अधिनियम की धारा 14-ख के तहत दर्ज मुकदमे में जमानत की मांग की गई। - हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं ने दलील दी कि सबा फरहत और उनकी पुत्री ऐमन विधिसम्मत तरीके से भारत में रह रहे हैं। सबा के पास 10 मार्च, 2027 तक वैध लॉन्ग टर्म वीजा है और वह करीब 35 वर्षों से भारत में रह रही हैं। इस दौरान उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि का कोई रिकॉर्ड नहीं है। - बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि ऐमन फरहत का भारतीय पासपोर्ट 5 जुलाई, 2022 को जारी हुआ था, जो 3 जुलाई 2032 तक वैध है। पासपोर्ट में उनके पिता भारतीय नागरिक दर्शाए गए हैं। साथ ही 23 सितंबर, 2010 और 16 नवंबर 2011 को नागरिकता नियम 2009 के नियम 5(1)(ए) के तहत भारतीय नागरिकता के लिए ऑनलाइन आवेदन भी किया गया था। तत्कालीन जिलाधिकारी ने एलआईयू की रिपोर्ट के आधार पर नागरिकता दिए जाने की संस्तुति भी की थी। - वोटर आईडी से जुड़े आरोपों का भी बचाव पक्ष ने खंडन किया। अदालत को बताया गया कि जिस वोटर आईडी को सबा फरहत का बताया जा रहा था, वह वास्तव में हस्तिनापुर की 39 वर्षीय दूसरी महिला का है। इसके अलावा सबा ने पाकिस्तान के अलावा किसी अन्य देश की यात्रा नहीं की और उनके नाम पर भारत में कोई मोबाइल सिम भी जारी नहीं हुआ। - बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि सबा फरहत के पति मसूद को 27 अप्रैल, 2026 को अग्रिम जमानत मिल चुकी है। शियोरिटी बॉन्ड धनराशि हुई 50 हजार हाईकोर्ट में सबा फरहत की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एनआई जाफरी व मोहम्मद असलम ने मजबूती से पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने सबा फरहत को जमानत देते हुए व्यक्तिगत मुचलके और दो जमानतदारों के आधार पर रिहा करने के आदेश दिए। एडवोकेट वीके शर्मा बताते हैं कि कोर्ट ने बॉन्ड की राशि दोगुनी कर दी है। यानी अब शियोरिटी बॉन्ड 25 हजार से 50 हजार कर दिया गया है। सारे दस्तावेज जमा करा दिए गए हैं जो सत्यापन के लिए भेजे गए हैं। सरकारी विभाग कांवड़ यात्रा में व्यस्त दस्तावेजों के सत्यापन का काम थाना पुलिस के अलावा आरटीओ का होता है। दोनों ही विभाग इन दिनों कांवड़ यात्रा में व्यस्त चल रहे हैं। ऐसे में सत्यापन प्रक्रिया में दो से तीन दिन का समय लग सकता है। अगर ऐसा हुआ तो सबा फरहत को अभी कम से कम तीन दिन और जेल की सलाखों के पीछे रहना होगा। मंगलवार तक रिहाई की संभावना जताई जा रही है।
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