एआइ अब महज एक निष्क्रिय औजार नहीं रहा, बल्कि एक स्वायत्त अभिकर्ता एजेंट बन चुका है, जो इंसानी नियमों और डिजिटल दीवारों को तोडक़र खुद निर्णय ले सकता है और विनाशकारी कदम उठा सकता है। सबसे बड़ा संदेश यह है कि पारंपरिक सुरक्षा घेरे (सैंडबॉक्स और फायरवॉल) अब एआइ के सामने बेअसर हो चुके हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह हमला सीमाओं (बॉर्डर्स) से परे था, इसलिए कोई भी देश, चाहे वह अमरीका हो, भारत, चीन या यूरोप भी इस खतरे से अछूता नहीं है।
This is a summary. For the full story, refer to the original source. Public of India presents verified citizen-relevant reporting.