सुगौली नगर के धनही महादेव टोला स्थित ऐतिहासिक युग्म पंचमुखी शिव मंदिर में सोमवार से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ेगी। श्रावण मास की पहली सोमवारी को देखते हुए मंदिर को पूरी तरह से सजाया गया है। रविवार देर रात तक साफ-सफाई और सजावट का कार्य चलता रहा, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करेंगे। यह मंदिर वैसे तो प्रतिदिन भक्तों के लिए खुला रहता है, लेकिन सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां विशेष भीड़ उमड़ती है। प्रखंड सहित आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। इस मंदिर का मुख्य आकर्षण यहां स्थापित युग्म शिवलिंग है। यह विश्व प्रसिद्ध युग्म पंचमुखी शिव मंदिर भारत-नेपाल के बीच हुई ऐतिहासिक सुगौली संधि की एक महत्वपूर्ण निशानी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह विश्व का एक अनोखा शिवालय है, जहां एक साथ दो शिवलिंग स्थापित हैं, जो संधि का प्रतीक माने जाते हैं। इस मंदिर की स्थापना 1830 में बेतिया के तत्कालीन महाराजा आनंद किशोर द्वारा संधि स्थल के समीप की गई थी। मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष प्रदीप सर्राफ ने बताया कि पंचमुखी युग्म शिव मंदिर का विशेष महत्व है और इसे एक सिद्ध शिवालय माना जाता है। उन्होंने कहा कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सर्राफ के अनुसार, सावन की सोमवारी पर लगभग दस से पंद्रह हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जिसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सावन महीने के प्रत्येक सोमवार को अहले सुबह से हीं श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। जहां हजारों की संख्या में लोग पहुंच पूजा अर्चना करते है। सिकरहना नदी से जल भर बडे संख्या मे श्रद्धालु भक्त जलभरी कर शिवालय पहूंच पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक करते है। पुरे सावन भर मेले का आयोजन भी होता है।
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