ओंकारेश्वर के प्राचीन कुबेर भंडारी मंदिर में गुरुवार शाम दीपदान के साथ दो दिवसीय धार्मिक आयोजन शुरू हुआ। रात 10 बजे सत्यनारायण कथा होगी। इसके बाद सुबह 4 बजे तक भजन संध्या चलेगी। शुक्रवार, 6 नवंबर को धनतेरस पर महाअभिषेक, कुबेर लक्ष्मी महायज्ञ, महाआरती और भंडारे का आयोजन होगा। सुबह 4 बजे होगा महादेव का अभिषेक शुक्रवार सुबह 4 बजे कुबेर भंडारी महादेव का महाअभिषेक किया जाएगा। इस दौरान मां नर्मदा और गंगा का पूजन भी होगा। सुबह 6 बजे श्री कुबेर लक्ष्मी महायज्ञ शुरू होगा। सुबह 9:30 बजे महायज्ञ की महाआरती के बाद श्रद्धालुओं को श्री कुबेर सिद्धि पैकेट दिए जाएंगे। इनमें रुद्राक्ष और कुबेरजी के प्रसाद के रूप में ज्वार होगा। इसके बाद भजन और भंडारा होगा। जन सहयोग से दोबारा स्थापित हुआ मंदिर खरगोन जिले के ग्राम कतोरा निवासी दादा चेतराम चौधरी (गुजर दादा) 90 के दशक से मंदिर में पूजन और सेवा करते थे। उन्होंने करीब 16 साल तक मंदिर में सेवा की। ओंकारेश्वर बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में मंदिर आने के बाद गुजर दादा और समिति के सदस्यों ने जन सहयोग से ओंकार प्रसादालय के पास कुबेर भंडारी मंदिर को दोबारा स्थापित किया। वर्ष 2006-07 से 2013 तक गुजर दादा के सानिध्य में आयोजन होते रहे। उनके निधन के बाद मंदिर समिति ने यह परंपरा आगे बढ़ाई। मंदिर में श्रद्धालु लगातार दर्शन और पूजन के लिए पहुंचते हैं। समिति के अनुसार, गुरुवार को करीब 20 हजार श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। ज्वार चढ़ाने की मान्यता मंदिर में श्रद्धालु भगवान कुबेर भंडारी को ज्वार चढ़ाते हैं। मान्यता है कि ज्वार चढ़ाने से घर में धन-धान्य बना रहता है। इसी आस्था के चलते धनतेरस पर ओंकारेश्वर और आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मंदिर समिति के अध्यक्ष किशोर बिरला, उपाध्यक्ष गोपाल बिरले और सचिव नारायण मंडलोई हैं।
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