बैतूल जिले के भीमपुर ब्लॉक स्थित दामजीपुरा क्षेत्र में आदिवासी किसानों की पीढ़ियों से उगाई जा रही पारंपरिक दलहनी फसल 'गडमल' को अब राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। भारत सरकार के 'पौधा किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण' (PPVFRA) ने इस दुर्लभ फसल को संरक्षण प्रदान किया है। फसल के संरक्षण और संवर्धन के लिए क्षेत्र के किसानों को 10 लाख रुपए की सम्मान राशि दी जाएगी। आगामी 12 नवंबर को दिल्ली में आयोजित विशेष समारोह में किसानों को 'कम्युनिटी अवॉर्ड' से सम्मानित किया जाएगा। गुरुवार को कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) बैतूल के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एसके तिवारी ने ये जानकारी दी, उन्होंने बताया कि केवीके ने साल 2022 से गडमल के संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन पर काम शुरू किया था। किसानों की समिति बनाकर बीजों के सैंपल (जर्मप्लाज्म) एकत्र किए गए और उन्हें जांच के लिए ICAR-नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज, नई दिल्ली भेजा गया। मार्च 2024 में 'इंडियन जर्नल ऑफ ट्रेडिशनल नॉलेज' में छपे शोधपत्र में इसे बैतूल की खास पारंपरिक फसल माना गया है। राष्ट्रीय पुरस्कार से मिलने वाली 10 लाख रुपए की राशि गडमल को सहेजने वाले स्थानीय किसानों में बांटी जाएगी। 23.8% प्रोटीन से भरपूर, पचने में आसान वैज्ञानिक परीक्षण में गडमल के बीजों में 23.8 प्रतिशत प्रोटीन और 19.3 प्रतिशत डाइटरी फाइबर (ये ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। ) पाया गया है, जिसके गुण काफी हद तक उड़द से मिलते-जुलते हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों के मुताबिक यह उड़द की तुलना में काफी हल्की और पचने में आसान होती है। आदिवासी समाज के लोग इसका इस्तेमाल दाल, वड़े और रोटी बनाने में करते हैं। इसके आटे से बने व्यंजनों को धार्मिक और पारंपरिक अनुष्ठानों में देवी-देवताओं को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। किसान बारिश के बाद अगस्त के आखिर से सितंबर की शुरुआत में इसकी बोवनी करते हैं। पीला मोजेक बीमारी से घट रहा रकबा वर्तमान में करीब 30 गांवों में गडमल की खेती की जा रही है। हालांकि, पीढ़ियों से एक ही बीज का लगातार इस्तेमाल होने के कारण फसल में 'पीला मोजेक' रोग का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे इसका रकबा घट रहा है। केवीके और दिल्ली की वैज्ञानिक संस्थाएं अब इस बीमारी से निपटने के लिए रोग-प्रतिरोधक किस्में विकसित करने पर काम कर रही हैं। डॉ. तिवारी के अनुसार राष्ट्रीय पहचान मिलने के बाद अब पारंपरिक बीजों को सुरक्षित करने और किसानों की आय बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। प्रशासन अब गडमल को जीआई टैग (GI Tag) दिलाने की दिशा में भी प्रयास कर रहा है।
This is a summary. For the full story, refer to the original source. Public of India presents verified citizen-relevant reporting.