जोधपुर जिले की तिंवरी तहसील की पांचला खुर्द ग्राम पंचायत में चुनाव की मतगणना के बाद हारे हुए प्रत्याशी ने विरोध दर्ज किया है। सरपंच पद के प्रत्याशी रहे परवीन्द्र सिंह ने आरोप लगाया है कि खए बूथ पर कुल चार मतपेटियां थी जिनमें से तीन पर सील लगी हुई थी और एक पर लगी हुई नहीं थी। उन्होंने ये भी कहा कि विपक्षी प्रत्याशी को जल्दबाजी में जीत का प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें और उनके बूथ एजेंट को मतगणना स्थल से जबरदस्ती बाहर निकाला गया। प्रत्याशी ने अब रिटर्निंग अधिकारी को लिखित शिकायत दी है। मतपेटी पर सील नहीं लगी हुई थी- प्रत्याशी शिकायतकर्ता परवीन्द्र सिंह ने बताया कि उनके बूथ की कुल चार मतपेटियाँ थीं। इनमें से तीन मतपेटियों पर तो सील लगी हुई थी, लेकिन एक मतपेटी पर किसी प्रकार की कोई सील नहीं थी। जब उनके अधिकृत बूथ एजेंट ने इस गंभीर अनियमितता पर आपत्ति जतानी चाही, तो मौके पर हंगामा खड़ा हो गया। एजेंट से धक्का-मुक्की और प्रत्याशी को बाहर करने का आरोप आरोप है कि जब बूथ एजेंट ने बिना सील वाली पेटी का विरोध किया, तो उसके साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की की गई और उसे मतगणना स्थल से जबरन बाहर खदेड़ दिया गया। इतना ही नहीं, मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद शाम करीब 6 बजे खुद प्रत्याशी परवीन्द्र सिंह को भी मतगणना स्थल से यह कहकर बाहर भेज दिया गया कि वे शाम 7:30 बजे वापस आएं। इस दौरान उन्हें मतगणना की आगे की प्रक्रिया पर नजर रखने और अपनी आपत्तियां दर्ज कराने से वंचित कर दिया गया। पहले से तैयार था प्रमाण-पत्र प्रार्थी ने आरोप लगाया कि उनकी आपत्तियों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए विपक्षी प्रत्याशी को चुपचाप जीत का प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया। स्थिति को देखकर ऐसा लगा मानो विपक्षी प्रत्याशी का जीत का प्रमाण-पत्र पहले से ही तैयार रखा गया था। यह हैं प्रमुख माँगें: चारों मतपेटियों की सील और वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच हो। बिना सील वाली मतपेटी को लेकर संबंधित अधिकारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाए। मतगणना स्थल की सीसीटीवी फुटेज और वीडियोग्राफी तत्काल सुरक्षित रखी जाए। एजेंट के साथ हुई धक्का-मुक्की और प्रत्याशी को बाहर भेजने की घटना की जांच हो। विपक्षी प्रत्याशी को प्रमाण-पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया और उसके दस्तावेजों की जांच की जाए। प्रार्थी परवीन्द्र सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर न्याय नहीं किया गया, तो वे इस अन्याय के खिलाफ उच्च अधिकारियों और सक्षम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
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