हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने अवैध खनन और क्रशर माफिया के खिलाफ दायर याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई की। इस दौरान राज्य शासन और प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की डबल बेंच ने अफसरों और खनन माफिया के बीच सांठगांठ की ओर इशारा करते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा- यह बात पूरी तरह से समझ से परे है कि जब बेसिक आरोप ही अत्यधिक खनन और ओवरलोडिंग के हैं, तो प्रशासन ने धर्मकांटों का रिकॉर्ड जब्त क्यों नहीं किया? इसका सीधा मतलब यही निकलता है कि सरकारी अफसर अब भी गलत काम करने वालों को अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाने के लिए उनसे मिले हुए हैं। धर्मकांटों की जांच का हिसाब दें कलेक्टर कोर्ट ने ग्वालियर कलेक्टर को निर्देश दिए हैं कि वे स्पष्ट जवाब दाखिल करें कि क्रशर क्षेत्र में लगे धर्मकांटों के रिकॉर्ड कभी जांचे या जब्त किए गए या नहीं? अगर नहीं किए गए, तो नोटिस जारी होने के बावजूद ऐसा क्यों नहीं हुआ? जबकि यहां से रिकॉर्ड जब्त किया जाना चाहिए था। शोकॉज नोटिस का 1 महीने में हो निपटारा कोर्ट ने कलेक्टर और सक्षम अधिकारियों को आदेश दिया है कि जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर दिन-प्रतिदिन सुनवाई की जाए और प्रक्रिया को आज से 1 महीने के भीतर हर हाल में पूरा किया जाए। बकायेदार माफिया की RRC का ब्योरा दें याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि कई खदान संचालकों पर रिकवरी सर्टिफिकेट (RRC) जारी होने के बावजूद वे अब भी धड़ल्ले से खनन कर रहे हैं और RRC पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर कोर्ट ने कलेक्टर को निर्देश दिया है कि वे जारी की गई हर RRC का पूरा ब्योरा दें और बताएं कि इन्हें कब तक निष्पादित किया जाएगा। अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को कोर्ट ने अंतरिम राहत और आदेशों को जारी रखते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 तय की है। साथ ही राज्य सरकार को अन्य आवेदनों पर भी अपना जवाब पेश करने का आदेश दिया है।
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