बक्सर। बक्सर के ऐतिहासिक किला मैदान में विजयादशमी पर रावण वध देखने के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा। एक लाख से अधिक लोग इस आयोजन के साक्षी बने। हजारों मोबाइल की टॉर्च एक साथ जलीं, तो पूरा मैदान रोशनी से जगमगा उठा। आतिशबाजी, पुतलों से निकलती रंग-बिरंगी आग और जय श्रीराम के जयकारों ने माहौल को रोमांचक बना दिया। पहले मेघनाथ, फिर रावण का हुआ दहन कार्यक्रम में सबसे पहले भगवान लक्ष्मण के हाथों 40 फीट ऊंचे मेघनाथ के पुतले का दहन किया गया। इससे पहले उसके मुकुट और मुंह से निकलती कोल्ड फायर और स्मूथ फायर की रंगीन लपटों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद भगवान श्रीराम और रावण के बीच काफी देर तक युद्ध का मंचन हुआ। अंत में 45 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया। दहन से पहले रावण के पूरे शरीर से निकलती रंग-बिरंगी आग आकर्षण का केंद्र बनी रही। पटाखों की गूंज के साथ रावण धू-धू कर जल उठा। इस दृश्य को मोबाइल में कैद करने के लिए दर्शकों में होड़ लगी रही। मोबाइल की रोशनी से जगमगाया मैदान रावण दहन के दौरान हजारों लोगों ने अपने मोबाइल की टॉर्च जला दी। सामने जलते विशाल रावण और मोबाइल की रोशनी से जगमगाते मैदान का नजारा बेहद आकर्षक दिखा। लोग इस यादगार पल को कैमरे में कैद करने के लिए आतुर नजर आए। सुरक्षा को लेकर पुलिस रही मुस्तैद भारी भीड़ को देखते हुए बक्सर पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। मैदान में वॉच टावर बनाकर निगरानी की गई। प्रवेश द्वारों पर मेटल डिटेक्टर लगाए गए थे। भीड़ नियंत्रण के लिए आठ प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए थे। बैरिकेडिंग कर मैदान को अलग-अलग जोन में बांटा गया था, ताकि लोगों की आवाजाही व्यवस्थित रहे। पुलिस चौकी से चरित्रवन रोड तक नो व्हीकल जोन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बक्सर पुलिस चौकी से नाथ बाबा-चरित्रवन रोड को नो व्हीकल जोन घोषित किया गया था। प्रमुख रास्तों और प्रवेश द्वारों पर पुलिसकर्मी तैनात रहे। लोगों की आवाजाही व्यवस्थित रखने के लिए लगातार लाउडस्पीकर से अनाउंसमेंट किया जा रहा था। ऐतिहासिक किला मैदान में रावण वध का आयोजन धार्मिक आस्था, रोमांच और सांस्कृतिक परंपरा का संगम बना। विशाल पुतलों के दहन और आतिशबाजी के बीच लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया।
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