पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (केपीके) प्रांत में हालात बहुत खराब हो चुके हैं. वहां इमरजेंसी लगाकर सरकार ने सीधे अपने हाथ में कंट्रोल ले लिया है, जिससे नया राजनीतिक बखेड़ा खड़ा हो गया है. पाकिस्तान ने बरसों से आतंकवादियों को पाला-पोसा है और उन्हें 'अच्छे' और 'बुरे' आतंकवादियों में बांटा है. इसी पुरानी गलती की वजह से आज पाकिस्तान खुद अपने ही बुने हुए जाल में बुरी तरह फंस गया है. केपीके के 12 जिलों में सेना और बिना चुने हुए लोगों का दखल बहुत बढ़ गया है. हालत यह है कि विपक्षी नेताओं पर सख्ती की जा रही है, मीडिया की आवाज दबाई जा रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस सख्ती और जुल्म से आतंकवाद खत्म हो पाएगा, या फिर इससे आम जनता का गुस्सा और ज्यादा भड़केगा?
This is a summary. For the full story, refer to the original source. Public of India presents verified citizen-relevant reporting.