ओडिशा के खोर्दा में ड्रोन तकनीक खेती के तौर तरीकों को बदल रही है. खेती के मौसम में मजदूरों की कमी की समस्या में जूझ रहे किसान अब ड्रोन की मदद से खेतों में खाद और कीटनाशकों का छिड़काव कराते हैं. इलाके में इस बदलाव का श्रेय जाता है कुमुदिनी स्वैन को, जिन्हें लोग ड्रोन दीदी के नाम से बुलाते हैं. ड्रोन दीदी बनने से पहले कुमुदिनी स्वैन भी खेतीबाड़ी करती थीं, लेकिन नमो ड्रोन दीदी योजना ने उनकी जिंदगी बदल दी. खेतों में कीटनाशकों, नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के छिड़काव के काम में ड्रोन मददगार साबित हो रहा है. कुमुदिनी स्वैन के लिए ये ना सिर्फ आमदनी का जरिया है, बल्कि इलाके में ये एक अनूठा प्रयोग है. कृषि के क्षेत्र में ड्रोन का प्रयोग कोई नई बात नहीं है, लेकिन नई तकनीक में महिलाओं की भागीदारी उनके लिए आमदनी के नए रास्ते खोल रही है. ट्रेनिंग, कठिन मेहनत और परिवार से सपोर्ट से उन्हें सफलता भी मिल रही है. कुमुदिनी स्वैन के हाथों में रिमोर्ट कंट्रोल सिर्फ ड्रोन को ऑपरेट करने का यंत्र नहीं है, बल्कि यह उनके आत्म-सम्मान को ऊंचा उठाने का एक जरिया भी है.
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