LIVE Public of India  •  Pan-India Citizen Newsroom  •  Verified Reporting
support@publicofindia.in Membership
BREAKING
Submit your story — verified, policy-led, privacy-first publishing Hindi & English news updated every 15 minutes from across India Members get priority review, profile badge & creator dashboard Public of India is a private platform — not a government website Submit your story — verified, policy-led, privacy-first publishing Hindi & English news updated every 15 minutes from across India Members get priority review, profile badge & creator dashboard Public of India is a private platform — not a government website
Home  /  POLITICS  /  हाईकोर्ट में 31-साल बाद पांच-जजों की लार्जर-बैं...
POLITICS Verified हिंदी

हाईकोर्ट में 31-साल बाद पांच-जजों की लार्जर-बैंच ने की सुनवाई:1995 के फैसले की वैधता और अनरजिस्टर्ड एसोसिएशन की याचिका के अधिकार पर होगा निर्णय

India • 12h ago • Source: publicofindia

राजस्थान हाईकोर्ट में 72 साल के इतिहास में दूसरी बार पांच न्यायाधीशों की वृहद पीठ ने महत्वपूर्ण विधिक सवालों पर सुनवाई कर निर्णय सुरक्षित रखा है। जैसलमेर जिला किसान संघर्ष समिति बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य प्रकरण में सुनवाई के दौरान न्यायिक पीठ के संदर्भ की सीमा, पूर्व निर्णयों की बाध्यकारी प्रकृति और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अनरजिस्टर्ड एसोसिएशन के याचिका दायर करने के अधिकार जैसे अहम मुद्दों पर विचार किया गया। मुख्य न्यायाधीश संजय के अग्रवाल की अध्यक्षता वाली पीठ में न्यायाधीश मुनुरी लक्ष्मण, चंद्रशेखर शर्मा, बलजिंदर सिंह संधू और बिपिन गुप्ता शामिल थे। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अर्पित भूत ने पक्ष रखा। ये था पूरा मामला यह मूल प्रकरण वर्ष 1996 में दायर डीबी सिविल रिट याचिका से जुड़ा है। इसमें जैसलमेर क्षेत्र में कमांड भूमि के आवंटन और कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया था। वर्ष 2001 में सुनवाई के दौरान आरएसईबी अकाउंटेंट्स एसोसिएशन बनाम राजस्थान राज्य विद्युत मंडल मामले में दिए गए पूर्णपीठ के फैसले से जुड़े कानूनी सवाल सामने आए। इस पूर्व फैसले में पीठ को संदर्भित सीमित प्रश्न से आगे बढ़कर अनरजिस्टर्ड एसोसिएशन की रिट याचिका की पोषणीयता पर भी निर्णय दिया गया था। अब वृहद पीठ को तय करना है कि क्या कोई पीठ संदर्भित प्रश्नों से आगे जाकर निर्णय दे सकती है और ऐसे निष्कर्ष कितने बाध्यकारी होंगे। साथ ही, अनरजिस्टर्ड एसोसिएशन के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका दायर करने तथा मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर राहत मांगने के अधिकार पर भी निर्णय होना है। पांच जजों की लार्जर बैंच ने फैसला रखा सुरक्षित 15 सितंबर 2026 को तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मामले को बड़ी पीठ के समक्ष रखने के लिए मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा था। पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा। इससे पहले वर्ष 1995 में गोपी लाल तेली बनाम राजस्थान राज्य मामले में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने निर्णय सुनाया था। अब इस महत्वपूर्ण मामले में हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार है।

This is a summary. For the full story, refer to the original source. Public of India presents verified citizen-relevant reporting.