छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गुरुवार को एक दिवसीय दौरे पर राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ पहुंचे। नवरात्रि की पंचमी पर उन्होंने मां बम्लेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने धर्मांतरण के बाद आदिवासियों के आरक्षण पर अपनी राय रखी। बघेल ने कहा कि किसी आदिवासी के धर्म बदलने से उसे आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता। भूपेश बघेल ने प्रदेश के औद्योगिक संसाधनों और बिजली व्यवस्था को लेकर चिंता जताई। धर्मांतरण और आरक्षण पर कही यह बात सुप्रीम कोर्ट के 15 अक्टूबर 2026 के फैसले को लेकर सवाल पूछे जाने पर बघेल ने कहा कि ऐसा कोई फैसला उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के किसी व्यक्ति के धर्म परिवर्तन के बाद आरक्षण को लेकर संवैधानिक प्रावधान हैं, जबकि आदिवासियों के मामले में स्थिति अलग है। उनके मुताबिक, सिर्फ धर्म परिवर्तन करने से किसी आदिवासी को आरक्षण से वंचित नहीं किया जा सकता। हालांकि, आरक्षण का लाभ संबंधित संवैधानिक प्रावधानों और कानूनी शर्तों के आधार पर तय होता है। भिलाई स्टील प्लांट को लेकर लगाया आरोप भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और प्राकृतिक संसाधनों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि अडानी समूह की नजर अब भिलाई स्टील प्लांट पर है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी मिली है। हालांकि, उनके इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। बघेल ने तमनार, हसदेव और नंदी पहाड़ का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में अडानी समूह का प्रभाव बढ़ रहा है। उन्होंने एसीसी सीमेंट और बिजली उत्पादन से जुड़े प्रतिष्ठानों का भी उल्लेख किया। बोले- प्रदेश के लोगों को मिलना चाहिए संसाधनों का लाभ बिजली व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कई पावर प्लांट हैं, जहां बिजली बनाने के लिए प्रदेश के कोयले और पानी जैसे संसाधनों का इस्तेमाल होता है। इसके बावजूद आम लोगों को बिजली के मामले में उतनी राहत नहीं मिल रही है, जितनी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब संसाधन छत्तीसगढ़ के हैं, तो उनका फायदा भी प्रदेश की जनता को मिलना चाहिए। बघेल ने बिजली व्यवस्था और बढ़ती महंगाई को आम लोगों से जुड़े अहम मुद्दे बताया।
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