गढ़वा। समाज को पतन से बचाने के लिए संस्कार परंपरा को फिर से स्थापित करना होगा, यह बात गायत्री परिवार के विनोद पाठक ने कही। वे शारदीय नवरात्रि पर गायत्री शक्तिपीठ, कल्याणपुर में आयोजित रामकथा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कार परंपरा पूरी तरह वैज्ञानिक है, जिससे मनुष्य का शारीरिक और आध्यात्मिक विकास होता है। भगवान राम अवतारी पुरुष थे, फिर भी राजा दशरथ ने गुरु वशिष्ठ से उनके सभी संस्कार कराए। आज संस्कार छोड़ने से ही समाज में नैतिक पतन, अनीति और व्यभिचार बढ़ रहा है। कानून से नहीं, बल्कि 16 संस्कारों को अपनाने से ही बदलाव आएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सहायक धीरज पाठक व उनकी पत्नी निवेदिता पाठक ने दीप जलाकर किया। इस मौके पर शिवपूजन मेहता ने संस्कार आधारित गीत प्रस्तुत किए। सरयू चंद्रवंशी, मिथिलेश कुशवाहा, चंद्रमणि कुमार सहित कई लोग उपस्थित थे। Blog Site Manager By Global Info Edge
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