भागलपुर कोर्ट ने कटिहार के डीसीएलआर कार्यालय के पेशकार वीरेंद्र कुमार सिन्हा को रिश्वत लेने के मामले में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कुल 3 साल का सश्रम कारावास और 12,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न देने पर उन्हें दो महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी। यह मामला 2012 का है। कटिहार निवासी मनोज कुमार सिंह ने शिकायत की थी कि उनके लंबित मामले में अंतिम आदेश के लिए पेशकार वीरेंद्र कुमार सिन्हा ने 60,000 रुपये की रिश्वत मांगी थी। इसमें 50,000 रुपये डीसीएलआर और 10,000 रुपये पेशकार के लिए तय हुए थे। मनोज की शिकायत पर आर्थिक अपराध इकाई ने जांच शुरू की। 6 जुलाई 2012 को आरोपों का सत्यापन हुआ, जिसमें पेशकार ने 6,000 रुपये अग्रिम मांगे थे। इसके बाद आरोपी को रंगे हाथों पकड़ने की योजना बनाई गई थी। नवगछिया से पहुंची आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने कटिहार स्थित डीसीएलआर कार्यालय में छापेमारी की। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 17 गवाह पेश किए गए कार्रवाई के दौरान पेशकार वीरेंद्र कुमार सिन्हा को कथित तौर पर 6,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। मामले के विवरण के अनुसार, उस समय तत्कालीन डीसीएलआर डोमन राम मौके से भाग गए थे। इसके बाद उनके खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि, मौजूदा सजा संबंधी जानकारी पेशकार वीरेंद्र कुमार सिन्हा के विरुद्ध सुनाए गए फैसले से जुड़ी है। इस मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 17 गवाह पेश किए गए। वर्ष 2012 में हुई कार्रवाई के बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया से गुजरा और अभियोजन पक्ष ने अपने आरोपों के समर्थन में गवाहों के बयान प्रस्तुत किए लगभग तीन साल तक चली बहस के बाद अदालत ने 12 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाया। अदालत ने वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव उर्फ वीरेंद्र कुमार सिन्हा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए सजा और जुर्माने का आदेश दिया अदालत ने दोषी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत तीन साल के सश्रम कारावास और 6,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त धारा 13(2) के तहत दो साल के सश्रम कारावास और 6,000 रुपये जुर्माना लगाया गया है। दोनों धाराओं के तहत कुल 12,000 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया इस प्रकार दोनों धाराओं के तहत कुल 12,000 रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर दो महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतने का प्रावधान बताया गया है। दोनों सजाओं के एक साथ या अलग-अलग चलने के संबंध में अंतिम आदेश की प्रति से पुष्टि करना आवश्यक है। कटिहार का यह मामला सरकारी कार्यालय में लंबित प्रकरण का अंतिम आदेश जारी कराने के बदले रिश्वत मांगने के आरोप से जुड़ा था। शिकायतकर्ता की ओर से आर्थिक अपराध इकाई से संपर्क किए जाने के बाद सत्यापन और छापेमारी की कार्रवाई हुई थी। इसके बाद गिरफ्तारी, प्राथमिकी और अदालत में सुनवाई की प्रक्रिया चली करीब 14 साल पुराने इस मामले में अदालत का फैसला भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव है। हालांकि, तत्कालीन डीसीएलआर डोमन राम के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी की वर्तमान स्थिति के संबंध में उपलब्ध विवरण में अलग से जानकारी नहीं दी गई है। कुल मिलाकर, कटिहार डीसीएलआर कार्यालय के तत्कालीन पेशकार वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव उर्फ वीरेंद्र कुमार सिन्हा को रिश्वत लेने के मामले में अदालत ने दोषी ठहराते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और धारा 13(2) के तहत सजा सुनाई है दोनों धाराओं के तहत कुल 12,000 रुपये जुर्माना लगाया गया है।
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