विकास परियोजनाओं के कारण अपनी जमीन और जंगल से बेदखल हो रहे किसानों, आदिवासियों और विस्थापित परिवारों का गुस्सा बढ़ गया है। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय बांध, रूंझ बांध और ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन से प्रभावित परिवार उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। वनहरी कला टपरियन में 'चिता आंदोलन' रविवार को 30वें दिन में पहुंच गया। जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर का अनशन भी लगातार 15वें दिन जारी है। इससे उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है, लेकिन आंदोलनकारियों का हौसला कम नहीं हुआ है। सवालों के जवाब मिलने तक आंदोलन होगा आंदोलनकारियों ने साफ किया है कि जब तक प्रभावित परिवारों के कानूनी अधिकारों और पुनर्वास से जुड़े सवालों का हल नहीं निकलता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि बिना सही व्यवस्था और मुआवजे के विस्थापन उनके अधिकारों का उल्लंघन है। ये हैं जेल में बंद इस बीच, जय किसान संगठन के चार साथी दिव्या अहिरवार, हिसाबी राजपूत, इंद्रपाल आदिवासी और कमलेश प्रजापति पिछले 13 दिनों से जेल में बंद हैं। शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से बुंदेलखंड में किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में गुस्सा है। संगठन जेल में बंद साथियों की तुरंत रिहाई की भी मांग कर रहा है। जय किसान संगठन ने चेतावनी दी है कि प्रभावित ग्रामीणों को न्याय दिलाना केवल एक आर्थिक मुआवजे की बात नहीं है, बल्कि यह उनके सम्मान, आजीविका, संस्कृति और जीवन जीने के अधिकार से जुड़ा गंभीर सवाल है। संगठन ने क्षेत्र के किसानों, मजदूरों, आदिवासियों, सामाजिक संगठनों और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी नागरिकों से अपील की है कि वे विस्थापितों के इस न्यायपूर्ण संघर्ष का समर्थन करने के लिए एकजुट होकर आगे आएं।
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