मंदसौर के गांधी चौराहे पर नगर पालिका सफाई कर्मचारियों का आंदोलन जारी है। वे 15 सूत्री मांगों को लेकर धरना पर बैठे हैं। 5 अक्टूबर से कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया है। जिससे शहर में जगह-जगह कचरा जमा हो गया है। बुधवार को मंदसौर से कांग्रेस विधायक विपिन जैन नेताओं के साथ धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन किया। कर्मचारियों को मामला विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया। विधायक ने कहा- ध्यान रख लेना जो धमकी दे रहे हैं। क्योंकि तुम साहूकार नहीं, तुम चोर हो। अगर तुम्हारा चिट्ठा खोल दिया, तो एक भी नहीं बचेगा। उन्होंनें कहा- मैं खुला कह रहा हूं। एक-एक नेता की नब्ज मेरे हाथ में है। सब चोर हैं। आप कोई भी मत डरो, मेरी पूरी पार्टी आपके साथ खड़ी है। 19 सितंबर से धरने पर बैठे नगर पालिका कर्मचारियों का आंदोलन 19 सितंबर से अलग-अलग चरणों में चल रहा है। 26 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू हुई थी। जिसके बाद 5 अक्टूबर से काम बंद हड़ताल शुरू की गई। काम बंद होने के बाद शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। कई जगह कचरा जमा होने लगा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे करीब दो सालों से अपनी मांगों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन दे रहे हैं। लेकिन मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों ने कहा कि अब भूख हड़ताल के बाद काम बंद हड़ताल शुरू की गई है। उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होगी। कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग कर्मचारी संयुक्त मोर्चे ने सफाई कर्मचारियों सहित 15 से 20 साल से कार्यरत कर्मचारियों को स्थायी करने की मांग की है। कर्मचारी की मौत के बाद परिवार के सदस्य को महीने के भीतर अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग भी शामिल है। शहर के विस्तार के अनुसार 100 पुरुष और 100 महिला सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति और तीन साल बाद उन्हें स्थायी करने की मांग रखी गई है। कर्मचारियों ने आउटसोर्सिंग, ठेका पद्धति और एनजीओ व्यवस्था बंद करने की मांग भी की है। 8 घंटे से ज्यादा काम पर अतिरिक्त भत्ते की मांग कर्मचारियों ने 8 घंटे से अधिक काम नहीं लेने और अतिरिक्त काम कराने पर अतिरिक्त भत्ता देने की मांग की है। अवकाश के दिन काम कराने पर उस दिन का वेतन देने तथा कर्मचारी का पक्ष सुने बिना सेवा से पृथक नहीं करने की मांग भी की गई है। समय पर वेतन की मांग कर्मचारियों ने मूल दस्तावेजों में छेड़छाड़ की शिकायतों पर कार्रवाई करने, दस्तावेज व्यवस्थित रखने और सेवा पुस्तिका में कर्मचारी के हस्ताक्षर कराने की मांग की है। ईपीएफ और अन्य आईडी के पासवर्ड कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से उपलब्ध कराने तथा हर महीने वेतन पर्ची देने की मांग भी की गई है। मोर्चे की मांग है कि कर्मचारियों को हर महीने 1 से 7 तारीख के बीच वेतन दिया जाए। कर्मचारियों का आरोप है कि कई बार सफाई कर्मचारियों को 15 से 20 तारीख तक किस्तों में वेतन मिलता है। इससे बैंक ऋण की किस्त समय पर जमा नहीं होने पर पेनल्टी और सिबिल स्कोर प्रभावित होने जैसी परेशानी आती है। ज्ञापन देने पर मिला नोटिस कर्मचारियों ने मांगों को लेकर ज्ञापन देने पर नोटिस या नौकरी से हटाने की धमकी नहीं देने की मांग की है। रैली या सामाजिक कार्यक्रमों के बाद सड़क पर फैले कचरे की सफाई के लिए आयोजक से 10 हजार रुपए सफाई खर्च लेने की मांग भी की गई है।
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