उदयपुर के आदिवासी बाहुल्य कोटड़ा इलाके में पुलिस और नारकोटिक्स विभाग ने ड्रग्स माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। नयावास गांव में पहाड़ों और खेतों के बीच करीब 9.4 बीघा जमीन पर अवैध रूप से की जा रही गांजे की खेती का भंडाफोड़ किया। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) जोधपुर, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) राजस्थान और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने जब मौके पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। खेतों में गांजे की हरी-भरी फसल लहलहा रही थी। टीम ने तुरंत एक्शन लेते हुए गांजे के 7,577 पौधों को उखाड़कर नष्ट कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, इन पौधों से करीब 2,273 किलो गांजा तैयार होना था, जिसकी इंटरनेशनल मार्केट में कीमत करीब 11.76 करोड़ रुपए आंकी गई। NCB जोधपुर के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी ने बताया कि मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। अब पटवारियों की होगी सीधी जिम्मेदारी इस कार्रवाई के बाद राजस्थान सरकार भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। सरकार ने प्रदेश में मादक पदार्थों की अवैध खेती को जड़ से खत्म करने के लिए नए और बेहद कड़े नियम जारी किए हैं। अब अपने इलाके में गांजे या अफीम की अवैध खेती को रोकने की सीधी जिम्मेदारी स्थानीय पटवारियों की होगी। लापरवाही की तो नपेंगे अधिकारी, 48 घंटे में देनी होगी रिपोर्ट नए सरकारी आदेश के मुताबिक, पटवारियों को गिरदावरी (फसल निरीक्षण) के दौरान अपने क्षेत्र के हर खेत पर पैनी नजर रखनी होगी। दिसंबर 2027 तक का है बड़ा लक्ष्य केंद्र और राज्य सरकार ने नारकोटिक्स नियंत्रण के विजन दस्तावेज के तहत एक बड़ा राष्ट्रीय लक्ष्य तय किया है। इसके तहत दिसंबर 2027 तक देश के सभी चिन्हित इलाकों से अवैध गांजे और अफीम की खेती को पूरी तरह से खत्म करना है। इसके लिए अब जिला कलेक्टरों को भी नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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