नई दिल्ली में मंगलवार, 6 अक्टूबर को DRDO ने AHAP पैराशूट का पहला लाइव जंप किया। यह परीक्षण लद्दाख के न्योमा (मुध DZ) में हुआ। जंप 16,000 फीट की ऊंचाई पर किया गया। पैराशूट 15,500 फीट पर खुला और जवानों ने 13,700 फीट ऊंचे न्योमा ड्रॉप जोन में लैंडिंग की। AHAP बेहद ऊंचाई वाले इलाकों में पैराट्रूपर्स को बड़ी संख्या में उतारने वाला स्टैटिक लाइन पैराशूट सिस्टम है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस परीक्षण से इसकी क्षमता और सैन्य उपयोग साबित हुआ। पैराशूट की खासियत रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह परीक्षण बेहद ऊंचाई वाले इलाकों के लिए देश में बने AHAP पैराशूट की क्षमता और सैन्य उपयोग को परखने के लिए किया गया। AHAP को आगरा की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADRDE) ने डिजाइन और विकसित किया है। इसका निर्माण ऑर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री (OPF), कानपुर ने किया है। इसकी जांच डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ एयरोनॉटिकल क्वालिटी एश्योरेंस (DGAQA) ने की है। इसे सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस एंड सर्टिफिकेशन (CEMILAC), RCMA कानपुर ने प्रमाणित किया है। मंत्रालय ने कहा कि AHAP में पैराशूट खोलने के कई तरीके हैं। इसकी ऑपरेशनल ऊंचाई की सीमा 18,000 फीट तक है। इसमें नीचे उतरने की दर सबसे सुरक्षित है। यह भारतीय रक्षा बलों की ऊंचाई वाले इलाकों की सैन्य जरूरतों के लिए खास तौर पर उपयोगी है। इतनी ऊंचाई पर स्टैटिक लाइन पैराशूट जंप करना मुश्किल और जोखिम भरा होता है। इसकी वजह पैराशूट खुलने पर लगने वाला बहुत तेज झटका और नीचे उतरने की तेज दर है। रक्षा मंत्री ने दी बधाई रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने AHAP स्वदेशी पैराशूट सिस्टम के पहले सफल लाइव जंप पर DRDO, रक्षा बलों, DPSUs और उद्योग को बधाई दी। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ा कदम बताया। रक्षा सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा DRDO के चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने सिस्टम के डिजाइन और विकास से जुड़े सभी टीम सदस्यों को बधाई दी।
This is a summary. For the full story, refer to the original source. Public of India presents verified citizen-relevant reporting.