नमो भारत कॉरिडोर से दौड़ेंगे एक्सप्रेस पार्सल, एनसीआरटीसी और ब्लू डार्ट में समझौता दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस के जरिए शहरी कार्गो परिवहन की संभावनाएं तलाशेंगे दोनों संस्थान, सफल मॉडल से घट सकती हैं डिलीवरी गाड़ियां और प्रदूषण मेरठ। दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर अब यात्रियों के साथ-साथ एक्सप्रेस पार्सल और शहरी कार्गो परिवहन के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है। इस दिशा में एनसीआरटीसी और ब्लू डार्ट एक्सप्रेस लिमिटेड ने समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों संस्थाएं नमो भारत सेवाओं को ब्लू डार्ट के मौजूदा पिकअप और डिलीवरी नेटवर्क से जोड़कर पूरे एनसीआर में एक्सप्रेस पार्सल की आवाजाही की संभावनाएं तलाशेंगी। इस पहल के तहत सेवा की व्यवहारिकता का अध्ययन किया जाएगा। इसमें परिचालन संबंधी जरूरतों, संभावित पार्सल की संख्या, नमो भारत स्टेशनों पर उपलब्ध सुविधाओं और अन्य जरूरी पहलुओं का आकलन किया जाएगा। उद्देश्य नमो भारत के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करते हुए ई-कॉमर्स कंसाइनमेंट और अन्य शहरी कार्गो के लिए तेज, टिकाऊ और दीर्घकालिक लॉजिस्टिक्स मॉडल तैयार करना है। 82 किमी कॉरिडोर बनेगा कार्गो नेटवर्क का आधार दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की लंबाई करीब 82 किलोमीटर है। यह दिल्ली को मेरठ से एक घंटे से भी कम समय में जोड़ता है। कॉरिडोर गाजियाबाद, मुरादनगर, रिठानी और मोदीपुरम जैसे प्रमुख और पेरी-अर्बन क्षेत्रों से होकर गुजरता है। दिल्ली में सराय काले खां और आनंद विहार जैसे प्रमुख परिवहन केंद्रों से इसकी कनेक्टिविटी है। कॉरिडोर पर दो डिपो हैं। गाजियाबाद के दुहाई में डिपो परिचालित है, जबकि मेरठ के मोदीपुरम में दूसरा डिपो निर्माणाधीन है। ऐसे में नमो भारत की तेज क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को ब्लू डार्ट के पिकअप और डिलीवरी नेटवर्क से जोड़कर समय-संवेदनशील पार्सल को तेजी से गंतव्य तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। सड़कों से कम हो सकती हैं डिलीवरी गाड़ियां एनसीआरटीसी के अनुसार, पूरे 82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के संचालन से सड़कों पर एक लाख से अधिक निजी वाहनों की संख्या कम होने का अनुमान है। इससे सालाना करीब 2.5 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने की संभावना है। यदि कार्गो परिवहन का प्रस्तावित मॉडल सफल रहता है तो सड़कों से सैकड़ों डिलीवरी वाहनों का दबाव भी घट सकता है। इससे ट्रैफिक जाम और प्रदूषण कम करने में मदद मिलने के साथ नमो भारत के पर्यावरणीय लाभ भी बढ़ सकते हैं। आर्थिक क्षमता बढ़ाने पर भी जोर यह पहल नमो भारत कॉरिडोर की अतिरिक्त कमर्शियल क्षमता का इस्तेमाल करने का अवसर भी देगी। नमो भारत जैसी कैपिटल-इंटेंसिव परियोजना में यात्री किराये के अलावा गैर-किराया राजस्व बढ़ाने की संभावनाएं तलाशना महत्वपूर्ण है। कार्गो मॉडल सफल होने पर कॉरिडोर की आर्थिक क्षमता मजबूत होने और नॉन-फेयर बॉक्स रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद है। रोज 1.1 लाख यात्री, अब कार्गो की संभावना दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर रोजाना करीब 1.1 लाख यात्री सफर कर रहे हैं। संचालन शुरू होने के बाद अब तक 4.5 करोड़ से अधिक यात्राएं दर्ज की जा चुकी हैं। बड़े यात्री नेटवर्क और तेज क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के कारण कॉरिडोर को यात्री परिवहन से आगे अन्य उपयोगों के लिए भी विकसित करने की संभावनाएं बढ़ी हैं। एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल ने कहा कि नमो भारत एनसीआर में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर करने, वाहनों का दबाव घटाने और वायु प्रदूषण नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ब्लू डार्ट के साथ समझौते से यह पता लगाने का अवसर मिलेगा कि आधुनिक रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल फ्रेट इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए किस तरह किया जा सकता है। डीएचएल ई-कॉमर्स डिवीजन के सीईओ पाब्लो सियानो ने कहा कि भारत तेजी से बढ़ता महत्वपूर्ण बाजार है। एनसीआरटीसी के साथ समझौते के जरिए यह समझने का अवसर मिलेगा कि बेहतर क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी ब्लू डार्ट के नेटवर्क और ग्राहकों के लिए किस तरह उपयोगी साबित हो सकती है।
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