(तस्वीरों के साथ) नयी दिल्ली, चार अक्टूबर विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने रविवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा का समर्थन किया, जिन्हें पुलिस ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने के प्रयास के दौरान हिरासत में ले लिया था। आरोप है कि उन्हें एक ऐसी निजी गाड़ी में ले जाया गया, जिस पर आधिकारिक नंबर प्लेट नहीं थी, जिसके कारण शुरुआत में उनके सहयोगियों और समर्थकों को उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। आइसा के सदस्यों ने आरोप लगाया कि गाड़ी में कोई भी महिला पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि नेहा को ले जाए जाने के बाद से वे उनसे संपर्क करने में असमर्थ थे। ‘ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन’ (एआईडीडब्ल्यूए) की नेता आशा शर्मा और मैमूना मुल्ला, आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता नवशरण सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता संसद मार्ग थाने पहुंचे। वे नेहा और अन्य महिला कार्यकर्ताओं के बारे में जानकारी लेने गए थे, जिन्हें कथित तौर पर बिना नंबर वाली निजी कारों में ले जाया गया था। बाद में, नेहा को नरेला औद्योगिक क्षेत्र थाने से रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए, राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि नेहा को (पुलिस द्वारा) ले जाए जाने की खबर मिलने के बाद से वह काफी चिंतित थे। ओ ब्रायन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘काफी चिंतित था... यह जानकर राहत मिली कि पुलिस कार में जबरन धकेले जाने के बाद, अब नेहा को नरेला थाने से रिहा कर दिया गया है। बैठकों से परे, ‘इंडिया’ (गठबंधन) जमीन पर मजबूती से खड़ा है।’’ भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने इससे पहले कहा कि नेहा को हिरासत में लेना ‘‘अपहरण’’ के समान है और दिल्ली पुलिस तुरंत उनके ठिकाने का खुलासा करे। उनकी रिहाई के बाद, भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि नेहा को नरेला औद्योगिक क्षेत्र थाने से रिहा कर दिया गया है। भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘अभी-अभी खबर मिली है कि कॉमरेड नेहा को नरेला औद्योगिक क्षेत्र थाने से रिहा कर दिया गया है। एक महिला कार्यकर्ता को केवल पुरुषों से भरी बिना नंबर वाली गाड़ी में जबरन उठा ले जाना और फिर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के बाद रिहा करना... यह दिल्ली पुलिस के लिए भी गिरावट का एक नया निचला स्तर है!’’ राजद सदस्य मनोज झा ने भी पुलिस की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भले ही दिल्ली पुलिस किसी ‘शहंशाह’ के इशारे पर काम कर रही हो, लेकिन उसे कम से कम एक बार ठहरकर यह जरूर सोचना चाहिए कि वे अपने जैसे ही परिवारों के सदस्यों के साथ ऐसा बर्बर व्यवहार क्यों कर रहे हैं।’’ झा ने कहा, ‘‘ये तस्वीरें लंबे समय तक लोगों के दिलो-दिमाग को झकझोरती रहेंगी। इतिहास गवाह है कि कोई भी ‘शाह’ हमेशा के लिए शाह नहीं रहता।’’ आइसा ने कहा कि नेहा को थाने से रिहा कर दिया गया, लेकिन कथित तौर पर उनका फोन और बैग उनके पास नहीं था। यह घटनाक्रम तब हुआ जब आइसा के कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन जंतर-मंतर लौटने का प्रयास किया।
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