इंदौर में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी से जुड़े प्रोफेशनल्स के लिए इंदौर फोटो फेयर का आयोजन किया जा रहा है। 3 अक्टूबर से अभय प्रशाल में शुरू हुए दो दिनी फेयर में विभिन्न कंपनियों और ब्रांड्स ने अपने प्रोडक्ट्स प्रदर्शित किए हैं। वहीं, मेंटर्स ने स्किल वर्कशॉप के जरिए फोटोग्राफर्स और वीडियोग्राफर्स को नई तकनीकों की जानकारी दी। फोटो में दृश्य के साथ जुड़ी होती है याद अंकिता अस्थाना ने बताया कि एआई से बनी तस्वीर और खुद खींची गई तस्वीर में सबसे बड़ा अंतर उससे जुड़ी याद का है। कैमरे से खींची गई तस्वीर को जब भी दोबारा देखते हैं तो उस पल की याद फिर से ताजा हो जाती है। तस्वीर सिर्फ एक दृश्य नहीं रहती, बल्कि उससे जुड़ी भावना और स्मृति भी साथ लौटती है। फोटो जिस समय खींची गई थी, उस समय व्यक्ति जैसा महसूस कर रहा था, तस्वीर देखने पर वही एहसास दोबारा महसूस हो सकता है। यही किसी तस्वीर को सिर्फ दृश्य सामग्री से आगे ले जाकर याद और पुरानी स्मृति से जोड़ता है। हितेश पटेल ने बताया कि फोटोग्राफी के बाजार में फ्रीलांस फोटोग्राफर, वीडियोग्राफर और फोटो स्टूडियो के बीच अब भी अंतर दिखाई देता है। किसी स्टूडियो के पास इवेंट की बुकिंग आने पर कई बार उसे उस दिन के लिए फ्रीलांस फोटोग्राफर या वीडियोग्राफर तलाशना पड़ता है। उपलब्धता, बुकिंग और बातचीत की पूरी प्रक्रिया अलग-अलग माध्यमों से होने के कारण इसमें समय भी लगता है और काम भी उलझ जाता है। अशोक विश्वनोई ने बताया कि टैक्सी बुकिंग या सैलून जैसी सेवाओं के लिए ऐप उपलब्ध हैं, जबकि फोटोग्राफी क्षेत्र में इस तरह का व्यवस्थित प्लेटफॉर्म लंबे समय से जरूरत रहा है। इसी अंतर को कम करने के लिए राजकोट के एक फोटोग्राफर ने ऐसा ऐप तैयार किया है, जिसमें स्टूडियो संचालक और फ्रीलांस फोटोग्राफर एक ही प्लेटफॉर्म पर जुड़ सकते हैं। इस ऐप में फोटोग्राफर अपना कैलेंडर और उपलब्ध तारीखें अपडेट कर सकते हैं। स्टूडियो संचालक उपलब्धता देखकर जरूरत के अनुसार फोटोग्राफर को बुक कर सकते हैं। इससे फ्रीलांस फोटोग्राफर्स को काम के अधिक अवसर मिलने और स्टूडियो संचालकों को एक ही जगह पर कई फोटोग्राफर्स की जानकारी मिलने की सुविधा होगी। इसका उद्देश्य बुकिंग प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करना है। फोटो से ज्यादा वीडियो की बढ़ रही डिमांड फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के क्षेत्र में लगातार नए कैमरे, लेंस, लाइटिंग और दूसरी तकनीकें बाजार में आ रही हैं। ऐसे में इनके साथ अपडेट रहना भी इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए जरूरी हो गया है। खासकर वीडियो के बढ़ते इस्तेमाल के साथ लगातार रोशनी देने वाली लाइट यानी कंटीन्यूअस लाइट का महत्व बढ़ा है। फोटोग्राफी में फ्लैश को कैमरे की शटर स्पीड के साथ सिंक कर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन वीडियो में इसी तरह फ्लैश का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसलिए वीडियोग्राफी में कंटीन्यूअस लाइट जरूरी होती है। मेंटर्स ने बताया कि मजबूत कंटीन्यूअस लाइट का इस्तेमाल फोटो और वीडियो दोनों में किया जा सकता है। इससे वीडियो में रोशनी बेहतर रहती है और जरूरत के अनुसार शैडो भी कम की जा सकती हैं। कंटीन्यूअस लाइटिंग के कई विकल्प अब बाजार में उपलब्ध हैं। कंटेंट क्रिएटर्स और इंफ्लुएंसर्स के लिए भी यह लंबे समय के इस्तेमाल के लिहाज से उपयोगी निवेश हो सकता है, क्योंकि एक ही लाइटिंग सेटअप का इस्तेमाल फोटो के साथ वीडियो कंटेंट बनाने में भी किया जा सकता है। तकनीक के साथ मकसद साफ होना भी जरूरी एएक्सपर्ट्स बोले- फोटोग्राफी का मूल उद्देश्य नहीं बदलना चाहिए एक्सपर्ट्स का कहना है कि फोटोग्राफी में लगातार बदलती तकनीक के बीच अपने मूल उद्देश्य को नहीं भूलना चाहिए। फोटोग्राफी शुरू करने के पीछे जो वजह थी, उसे हमेशा याद रखना जरूरी है। खासकर वेडिंग फोटोग्राफर्स के लिए हर तस्वीर किसी दूसरे व्यक्ति के जीवन की महत्वपूर्ण याद होती है। वेडिंग फोटोग्राफर का काम सिर्फ अच्छी तस्वीर बनाना नहीं, बल्कि शादी से जुड़े वास्तविक भावनात्मक पलों को भी कैमरे में सुरक्षित करना है। शादी करने वाले जोड़े के लिए ये तस्वीरें जीवनभर की याद होती हैं। इसलिए तस्वीरों में खुशी, भावनाएं, रिश्ते और उस पूरे दिन का वास्तविक माहौल दिखाई देना जरूरी है। सीखने और नई जानकारी हासिल करने लोगों में उत्साह फोटो फेयर में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और कंटेंट क्रिएशन के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हुए। यहां आए प्रतिभागियों में नई तकनीक सीखने और अपने काम को बेहतर समझने की उत्सुकता दिखाई दी। लोग यह जानना चाहते थे कि वे अपने काम में क्या बेहतर कर सकते हैं, बाजार में कौन से नए उपकरण आए हैं और नई तकनीक उनके काम को किस तरह आसान बना सकती है। कैमरा और लेंस के साथ स्टोरेज से जुड़े नए हार्डवेयर, फ्लैश ड्राइव, नए और मॉडिफाइड लेंस, लाइटिंग तकनीक और दूसरे उपकरण भी चर्चा का हिस्सा रहे। बदलती तकनीक के बीच अपने काम को अपडेट रखने की जरूरत को लेकर भी प्रतिभागियों ने जानकारी ली। अलग-अलग वर्कशॉप के माध्यम से मेंटर्स ने अपने अनुभव और वर्षों में सीखी तकनीकें साझा कीं। आयोजन में मौजूद लोगों के बीच नई जानकारी हासिल करने, सवाल पूछने और लगातार सीखते रहने की रुचि दिखाई दी।
This is a summary. For the full story, refer to the original source. Public of India presents verified citizen-relevant reporting.