प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जिला अदालतों में मुकदमों की सुस्त रफ्तार और जिला न्यायपालिका द्वारा मांगी गई जानकारी न देने पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने चार याचिकाओं की सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला 26 मई 2026 को सुरक्षित रख लिया था और 28 सितंबर 26 को फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि यह देरी किसी एक व्यक्ति का दोष नहीं, बल्कि संस्थागत व्यवहार का नतीजा है। उर्मिला मिश्रा- प्रयागराज के नैनी थाने का 2009 का आपराधिक मामला 16 साल में 178 से ज्यादा बार लगा, पर आरोप तय नहीं हुए। सरफराज अहमद:- 2008 में ...
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