Rajeev Shukla किसी भी लोकतांत्रिक समाज में कानून का पहला उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षा देना और न्याय उपलब्ध कराना है। शिकायत दर्ज होना इसी न्याय-व्यवस्था की एक आवश्यक प्रक्रिया है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब किसी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज होते ही समाज की नजर में वह दोषी मान लिया जाता है। अदालत का फैसला आने से पहले ही उसकी प्रतिष्ठा , रोजगार , सामाजिक संबंध और मानसिक शांति प्रभावित होने लगती है। सवाल यही है कि क्या मुकदमा दर्ज होना अपने आप में सजा बन जाना चाहिए ? कानून की बुनियादी अवधारणा कहती है कि किसी ...
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