राजस्थान की धरती पर खेजड़ली का बलिदान केवल इतिहास की एक घटना नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति मनुष्य की जिम्मेदारी का जीवंत संदेश है। जोधपुर के निकट खेजड़ली गांव में अमृता देवी विश्नोई सहित 363 लोगों ने खेजड़ी के पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। पेड़ों और पर्यावरण को बचाने के लिए दिया गया यह बलिदान आज भी विश्नोई समाज की जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण की सोच का आधार बना हुआ है। इसी विषय को लेकर राजस्थान पत्रिका की ओर से हुब्बल्ली में आयोजित परिचर्चा में विश्नोई समाज के लोगों ने खेजड़ली बलिदान, पेड़-पौधों की रक्षा, वन्यजीव संरक्षण, जल संरक्षण और पर्यावरण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी पर विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि खेजड़ली की घटना को केवल ऐतिहासिक प्रसंग के रूप में याद करने के बजाय उसके संदेश को वर्तमान जीवन में उतारने की जरूरत है।
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