काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं से अराजकता, मारपीट और अभद्रता करने वाले एसडीएम शंभूशरण के खिलाफ वाराणसी की कोर्ट ने परिवाद दर्ज किया है। एसडीएम के खिलाफ शिकायतकर्ता के आरोपों को सही पाया है। कोर्ट ने वादी के साक्ष्य, गवाह, और इलेक्ट्रॉनिक एवीडेंस फुटेज के आधार पर अपील को परिवाद में दर्ज कर केस चलाने का आदेश दिया है। कोर्ट में 2006 के जजमेंट की नजीर रखते हुए अग्रिम कार्रवाई की बात कही। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में एसडीएम शम्भूशरण पर अभद्रता, जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल और मारपीट के दोषारोपण के साक्ष्य घटना को साबित करते हैं। कोर्ट ने एसडीएम को सम्मन जारी करके 3 नवंबर 2026 को तलब किया है। वाराणसी कोर्ट के विशेष न्यायाधीश एससी एसटी कोर्ट के जज सुधाकर राय ने काशी विश्वनाथ मंदिर एसडीएम के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई की। आवेदक बाबूलाल सोनकर ने कोर्ट में एसडीएम के खिलाफ बयान देकर घटनाक्रम बताया । प्रार्थना पत्र में बाबूलाल सोनकर ने आरोप लगाया कि 16 फरवरी 2026 की रात करीब 12:30 बजे वह अपने परिचित अनुज पाण्डेय के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में मौजूद थे। आरोप है कि इसी दौरान एसडीएम शम्भूशरण अपने निजी बाउंसरों के साथ वहां मौजूद थे और भक्तों के साथ धक्का-मुक्की कर रहे थे। आवेदक का आरोप है कि एसडीएम के कहने पर बाउंसरों ने उसे पकड़ लिया और उसके साथ गाली-गलौज की गई। एसडीएम ने साथ ही जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर सार्वजनिक रूप से अपमानित करने और गला दबाने का भी आरोप लगाया गया है। इस घटना की फुटेज में भी साफ नजर आ रहा है। बाउंसरों से बचाने वाले से भी मारपीट प्रार्थना पत्र के मुताबिक, अनुज पाण्डेय ने बीच-बचाव का प्रयास किया तो उसके साथ भी मारपीट और गाली-गलौज की गई। आवेदक ने दावा किया कि घटना के बाद अनुज पाण्डेय ने कबीरचौरा स्थित अस्पताल में उपचार कराया। मामले की सूचना उसी दिन थाना चौक को दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। आवेदक का कहना है कि थाना स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद 10 मार्च 2026 को पंजीकृत डाक के माध्यम से पुलिस आयुक्त वाराणसी को प्रार्थना पत्र भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। प्रार्थना पत्र के साथ आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, चिकित्सा संबंधी दस्तावेज, पुलिस अधिकारियों को भेजे गए प्रार्थना पत्र और अन्य कागजात भी न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने आदेश में कहा कि आवेदक ने घटना की तारीख, समय, स्थान और विपक्षीगण के नाम सहित घटना का विवरण दिया है। साथ ही आवेदक और गवाहों के माध्यम से न्यायालय के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत कर घटना को साबित किया जा सकता है। न्यायालय ने मो. यूसुफ बनाम श्रीमती आफाक जहां के केस की नजीर में विधि सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस से विवेचना कराने की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती। इसके बजाय प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में पंजीकृत कर न्यायालय में आगे की कार्यवाही किए जाने को उचित माना गया। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित अभियुक्तों को तलबी से पहले सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए कर्नाटक हाईकोर्ट के वाद संख्या 7526 of 2004 का के निर्णय 3 दिसंबर 2024 का हवाला दिया गया है। कोर्ट ने एसडीएम शंभूशरण को 3 नवंबर को तलब किया है, जिसमें आरोपी एसडीएम को बयान दर्ज कराना होगा। इसके बाद कोर्ट कार्रवाई करेगा। बता दें कि आरोपी SDM शंभूशरण का 2 महीने पहले विश्वनाथ मंदिर से ट्रांसफर हो चुका है लेकिन अफसरों की मिलीभगत से रिलीव नहीं हुआ।
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