मुख्यमंत्री ने ’05वें गोमती पुस्तक महोत्सव’ का शुभारम्भ किया विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री जी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ भेंट की पुस्तकें केवल पाठ्यक्रम तक सीमित ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, देश और दुनिया को समझने, चिन्तन को व्यापक बनाने तथा व्यक्ति की रचनात्मकता को विकसित करने का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा और विजन के अनुरूप शिक्षा मंत्रालय द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में पुस्तक महोत्सवों के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने का अभिनव प्रयास किया जा रहा वर्तमान समय में पुस्तकालय और पुस्तक संस्कृति को मजबूत करना आवश्यक प्रदेश सरकार द्वारा ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय तथा डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा विकसित की गयी ’ऑपरेशन कायाकल्प’ के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में अच्छे भवनों के साथ डिजिटल लाइब्रेरी और स्मार्ट क्लास की व्यवस्था की गई, इसका प्रभाव बच्चों के सीखने और आत्मविश्वास में दिखाई दे रहा पुस्तक मेले युवाओं को अपनी राह बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराते, युवाओं को इनका लाभ उठाना चाहिए नेशनल बुक ट्रस्ट, इण्डिया द्वारा 12 से 20 सितम्बर, 2026 तक आयोजित गोमती पुस्तक महोत्सव पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल राज्य के अन्य स्थानों पर भी ऐसे पुस्तक महोत्सव आयोजित किए जाने चाहिए, प्रदेश सरकार इस कार्य में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी उ0प्र0 समृद्ध ज्ञान परम्परा का प्रमुख केन्द्र रहा, लखनऊ साहित्य और ज्ञान की पुरानी परम्परा वाला क्षेत्र प्रत्येक युवा को अपना व्यक्तिगत ‘बुक बैंक’ बनाना चाहिए, यह बुक बैंक जीवनभर नई प्रेरणा और नई दिशा देने का कार्य करेगा मुख्यमंत्री ने वन्दे मातरम् पर आधारित प्रदर्शनी व पुस्तक स्टॉलों का अवलोकन किया लखनऊ : 12 सितम्बर, 2026 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने कहा कि पुस्तकें केवल पाठ्यक्रम तक सीमित ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज, देश और दुनिया को समझने, चिन्तन को व्यापक बनाने तथा व्यक्ति की रचनात्मकता को विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं। वर्तमान समय में पुस्तकालय और पुस्तक संस्कृति को मजबूत करना आवश्यक है। ज्ञान आधारित समाज के निर्माण के लिए पुस्तकों और पुस्तकालयों की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री जी आज यहां ’गोमती पुस्तक महोत्सव-2026’ के शुभारम्भ अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इससे पूर्व, मुख्यमंत्री जी ने फीता काटकर ’05वें गोमती पुस्तक महोत्सव’ का शुभारम्भ किया। उन्होंने वन्दे मातरम् पर आधारित प्रदर्शनी तथा पुस्तक स्टॉलां का अवलोकन किया और विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ भेंट की। ज्ञातव्य है कि गोमती पुस्तक महोत्सव 12 से 20 सितम्बर, 2026 तक नेशनल बुक ट्रस्ट, इण्डिया द्वारा आयोजित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा और विजन के अनुरूप शिक्षा मंत्रालय द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में पुस्तक महोत्सवों के माध्यम से भारत की प्राचीन ज्ञान परम्परा को आधुनिक ज्ञान से जोड़ने का अभिनव प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने नेशनल बुक ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो0 मिलिंद सुधाकर मराठे एवं निदेशक श्री युवराज मलिक को प्रधानमंत्री जी के विजन को धरातल पर प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि लखनऊ में आयोजित हो रहा यह गोमती पुस्तक महोत्सव इसका पांचवां संस्करण है। इसी प्रकार गोरखपुर में भी पुस्तक महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसने पुस्तक संस्कृति के प्रति युवाओं की रुचि को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज डिजिटल युग में अक्सर यह चिंता व्यक्त की जाती है कि युवा पुस्तकों से दूर होकर अपना अधिक समय सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया पर व्यतीत कर रहे हैं। लेकिन पुस्तक महोत्सवों के अनुभव ने इस धारणा को पूरी तरह नकारा है। इस पुस्तक महोत्सव की व्यापकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहले जहां लगभग 80 स्टॉल थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 250 हो गई है। अगले नौ दिनों तक लखनऊ के हजारों छात्र-छात्राओं और युवाओं को यहां विभिन्न प्रकार की ज्ञानवर्धक, मनोरंजक, रोचक एवं विविध विषयों की पुस्तकों से परिचित होने का अवसर मिलेगा। इस दौरान पुस्तकों के विमोचन, लेखकों से संवाद तथा उनकी अभिव्यक्ति और जीवन यात्रा को समझने के अवसर भी उपलब्ध होंगे। महापुरुषों की आत्मकथाओं एवं जीवन गाथाओं के माध्यम से उनके संघर्ष और उपलब्धियों को जानने का अवसर युवाओं को मिलेगा। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि केवल स्कूल, कॉलेज अथवा विश्वविद्यालय जाकर पाठ्यक्रम की पुस्तकें पढ़ लेने मात्र से व्यक्ति पूर्ण रूप से ज्ञानवान नहीं हो सकता। इसके इतर भी एक व्यापक दुनिया है, जिसे समझने की आवश्यकता है। पुस्तकें व्यक्ति को किसी विषय में पारंगत बनाने के साथ-साथ समाज, देश और दुनिया को समझने का दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। विभिन्न प्रकार की पुस्तकें पढ़कर व्यक्ति अपने ज्ञान का विस्तार कर सकता है और अपने आपको जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के लिए तैयार कर सकता है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि कोई व्यक्ति अचानक बड़ा नहीं बनता। सफलता की अपनी एक यात्रा होती है। इस यात्रा में व्यक्ति को असफलताओं और अनेक ठोकरों का सामना करना पड़ता है, लेकिन जो व्यक्ति हार नहीं मानता, वही सफलता की नई मंजिल प्राप्त करता है। प्रधानमंत्री जी की पुस्तक ‘एग्जाम वारियर्स’ विद्यार्थियों और युवाओं के लिए अत्यन्त उपयोगी है। प्रत्येक बच्चे को इस पुस्तक को पढ़ना और इसके संदेशों को आत्मसात करना चाहिए। यह केवल स्कूली विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रत्येक युवा और नागरिक के लिए भी उपयोगी है, क्योंकि जीवन में हर व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार की परीक्षा से गुजरना पड़ता है। कभी डिग्री प्राप्त करने के लिए, कभी किसी सर्टिफिकेट कोर्स के लिए और कभी जीवन की कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति की परीक्षा होती है। जब ऐसे समय में व्यक्ति का हौसला जवाब देने लगता है, तब ‘एग्जाम वारियर्स’ पुस्तक उसका सम्बल और मार्गदर्शक बन सकती है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि भारतीय ऋषि परम्परा ने सदैव ज्ञान को सीमित दायरे में देखने के बजाय सभी दिशाओं से श्रेष्ठ विचारों के स्वागत की प्रेरणा दी है। ’आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः’ की भावना यही है कि ज्ञान के सभी स्रोतों के लिए हमारे द्वार खुले रहने चाहिए। भारतीय ज्ञान परम्परा श्रुति और स्मृति के माध्यम से आगे बढ़ी। बाद में यह शास्त्रों, पाण्डुलिपियों, ताम्रपत्रों और विभिन्न अभिलेखों के माध्यम से संरक्षित एवं विस्तारित हुई। उत्तर प्रदेश इस समृद्ध ज्ञान परम्परा का प्रमुख केन्द्र रहा है। लखनऊ साहित्य और ज्ञान की पुरानी परम्परा वाला क्षेत्र है। लखनऊ और आसपास के क्षेत्र ने अनेक ऐसे साहित्यकार दिए हैं, जिन्होंने अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से देश को प्रभावित किया। नैमिषारण्य 88 हजार ऋषियों की परम्परा से जुड़ा स्थल है, जहां भारतीय वैदिक परम्परा और पुराणों की ज्ञानधारा को आगे बढ़ाने का कार्य किया गया। काशी के विश्वविद्यालय प्राचीन काल से ही विश्वविख्यात रहे हैं। प्रयागराज की धरती और वहां की कुम्भ परम्परा केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान एवं चिंतन परम्परा की महत्वपूर्ण स्थली रही है, जहां देशभर से ऋषि-मुनि एकत्र होकर ज्ञान, संवाद और नवाचार पर चिंतन करते थे। उत्तर प्रदेश की धरती पर लगभग 05 हजार वर्ष पूर्व मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ में श्रीमद्भागवत महापुराण की पहली कथा के वाचन की परम्परा भी जुड़ी हुई है। यह सब उत्तर प्रदेश की समृद्ध ज्ञान परम्परा का प्रमाण है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जिस प्रदेश के पास इतनी समृद्ध ज्ञान और सांस्कृतिक परम्परा हो, उसे आगे बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता था। लेकिन जब ज्ञान को सीमित दायरे में कैद करने का प्रयास किया गया और अपनी विरासत से दूरी बनाई गई, तो उसके दुष्परिणाम सामने आए। एक समय उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू राज्य’ की श्रेणी में खड़ा कर दिया गया था। प्रदेश के युवाओं के सामने पहचान का संकट था। प्रदेश का नागरिक बाहर जाने पर अपनी पहचान बताने से बचता था और अपनी पहचान छिपाने का प्रयास करता था। पिछले लगभग 10 वर्षों में सकारात्मक प्रयास प्रारम्भ हुए और आज उनके प्रभावी परिणाम सामने दिखाई दे रहे हैं। डिजिटल युग ने शहर और गांव की दूरी कम की है और नई सुविधाओं ने युवाओं के सामने ज्ञान एवं अवसरों के नए द्वार खोले हैं। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि गांव देश के विकास की सबसे पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। पहले ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के बैठने की भी समुचित व्यवस्था नहीं थी। ग्राम प्रधान अपने घर से गांव की व्यवस्था संचालित करता था। प्रदेश सरकार ने ग्राम सचिवालय की व्यवस्था विकसित की, जिसमें ग्राम प्रधान व सक्षम अधिकारी के बैठने के स्थान के साथ ही एक कॉन्फ्रेन्स रूम, डिजिटल लाइब्रेरी और पुस्तकालय बनाने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि प्रदेश में 57,600 ग्राम पंचायतें हैं और प्रत्येक ग्राम सचिवालय में पुस्तकालय की सुविधा विकसित की गई है। इन पुस्तकालयों में नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकें भी उपलब्ध करायी गयी हैं। साथ ही डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। आज गांव के विद्यार्थी और युवा ग्राम सचिवालय में जाकर पुस्तकालय में बैठतें हैं, पुस्तकों का अध्ययन करते हैं और डिजिटल लाइब्रेरी का उपयोग करते हैं। इससे उन्हें समाज और ग्राम पंचायत की गतिविधियों को नजदीक से समझने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की स्थिति में भी व्यापक परिवर्तन आया है। पहले जर्जर भवन, सीमित सुविधाएं और अन्य कमियां थीं। प्रदेश सरकार ने ’ऑपरेशन कायाकल्प’ के माध्यम से विद्यालयों के आधारभूत ढांचे में सुधार किया। विद्यालयों में अच्छे भवनों के साथ डिजिटल लाइब्रेरी और स्मार्ट क्लास की व्यवस्था की गई है। इसका प्रभाव बच्चों के सीखने और आत्मविश्वास में दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री जी ने चित्रकूट का उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2018 में उन्होंने वहां की स्थिति का अवलोकन किया था। चित्रकूट को नीति आयोग द्वारा आकांक्षी जनपद के रूप में चिन्हित किया गया था। वहां विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी विकसित की गई। एक वर्ष बाद जब उन्होंने अचानक एक विद्यालय का निरीक्षण किया तो तीसरी कक्षा की एक बालिका ने डिजिटल लाइब्रेरी को स्वयं संचालित करके दिखाया और अपने पाठ्यक्रम से सम्बन्धित सामग्री प्रस्तुत की। पहले सुविधाएं नहीं थीं, इसलिए बच्चे अपनी क्षमता का प्रदर्शन नहीं कर पाते थे। जब उनके सामने सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं तो बच्चों ने अपनी प्रतिभा और क्षमता का प्रदर्शन करना शुरू किया। ’निपुण भारत’ के माध्यम से बच्चों में बुनियादी भाषा एवं अंक ज्ञान विकसित हो रहा है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि पहले बच्चों को बहुत कुछ रटाया जाता था, लेकिन उन्हें वास्तविक ज्ञान और अक्षर-अंक ज्ञान से पर्याप्त रूप से परिचित नहीं कराया जाता था। आज जब वे बच्चों से पढ़ने के लिए कहते हैं तो बच्चे पूरे आत्मविश्वास और प्रसन्नता के साथ पढ़कर सुनाते हैं। इसका अर्थ है कि बच्चे में अक्षर ज्ञान और अंक ज्ञान विकसित हो गया है। जब बच्चे में पढ़ने की सामर्थ्य विकसित हो जाती है तो दुनिया की कोई भी चीज उसके लिए कठिन नहीं रहती। वह आगे चलकर विभिन्न विषयों को पढ़ और समझ सकता है। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज विद्यार्थियों और युवाओं को पहले की अपेक्षा अधिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। पहले छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाओं के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। आज सरकार द्वारा विभिन्न स्तरों पर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन सुविधाओं का सदुपयोग करने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि जब भी उन्हें कोई वस्तु खरीदने का अवसर मिले तो पाठ्यक्रम की पुस्तकों के साथ अपनी रुचि की कोई अच्छी और रचनात्मक पुस्तक खरीदने की आदत विकसित करें। प्रत्येक युवा को अपना व्यक्तिगत ‘बुक बैंक’ बनाना चाहिए। यह बुक बैंक जीवनभर नई प्रेरणा और नई दिशा देने का कार्य करेगा। खाली समय में पुस्तकों के पन्ने पलटने और उनका अध्ययन करने की आदत विकसित करनी चाहिए। इसमें अच्छा साहित्य, धार्मिक ग्रंथ, किसी महापुरुष की आत्मकथा अथवा किसी वैज्ञानिक के शोध और जीवन यात्रा से सम्बन्धित पुस्तकें शामिल हो सकती हैं। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि जब युवा अपने खाली समय को सकारात्मक और रचनात्मक दिशा में लगाएंगे तो यह रचनात्मकता उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि उनके लिए कोई भी मंजिल कठिन नहीं है। उन्हें अपनी राह स्वयं तैयार करनी है। पुस्तक मेले युवाओं को अपनी राह बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराते हैं। युवाओं को इन अवसरों का लाभ उठाना चाहिए और पुस्तक मेले में कुछ समय अवश्य व्यतीत करना चाहिए। युवा पुस्तक मेले में केवल स्टॉल पर जाकर पुस्तक का पन्ना पलटकर वापस न आएं, बल्कि यह जानने का प्रयास करें कि वहां कितने प्रकाशक हैं, किस प्रकार की रचनात्मक पुस्तकें उपलब्ध हैं और पुस्तकों की कितनी विविधता है। इससे उन्हें बहुत कुछ नया जानने और समझने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि 12 से 20 सितम्बर, 2026 तक आयोजित होने वाला गोमती पुस्तक महोत्सव पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय, नेशनल बुक ट्रस्ट और इससे जुड़ी सभी सहयोगी संस्थाओं को इस आयोजन के लिए हृदय से धन्यवाद दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक मेला केवल लखनऊ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे और व्यापक रूप देने की दिशा में कार्य किया जाएगा। प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी ऐसे पुस्तक महोत्सव आयोजित किए जाने चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार इस कार्य में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार नेशनल बुक ट्रस्ट की पुस्तकों की व्यापक स्तर पर खरीद कर रही है। सरकार का प्रयास है कि गांवों से लेकर कॉलेजों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों तक पुस्तकालयों की सुविधा उपलब्ध हो तथा विद्यार्थियों एवं युवाओं को ज्ञानवर्धक पुस्तकों तक सहज पहुंच प्राप्त हो। मुख्यमंत्री जी ने पुस्तक महोत्सव में आए बच्चों और युवा साथियों से अपील की कि वे यहां से कम से कम एक अच्छी और रचनात्मक पुस्तक अवश्य खरीदकर ले जाएं तथा उसका अध्ययन करें। युवा उस पुस्तक को पढ़ने के बाद अपने अनुभव नेशनल बुक ट्रस्ट और उनके साथ भी साझा करें। इससे पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को और प्रोत्साहन मिलेगा तथा युवाओं के अनुभवों से इस प्रकार के आयोजनों को और बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह महोत्सव प्रदेश में ज्ञान, अध्ययन, संवाद और रचनात्मकता की संस्कृति को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री श्री योगेन्द्र उपाध्याय, माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती गुलाब देवी तथा बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संदीप सिंह ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। इस अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 जे0पी0 सैनी, अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा श्री पार्थ सारथी सेन शर्मा, सलाहकार मुख्यमंत्री श्री अवनीश कुमार अवस्थी, नेशनल बुक ट्रस्ट (एन0बी0टी0) के चेयरमैन प्रो0 मिलिंद सुधाकर मराठे तथा निदेशक श्री युवराज मलिक सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। ----------
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