ब्रिक्स नेताओं ने शनिवार को पूरे समूह के लिए अनाज व्यापार मंच और किसानों पर केंद्रित चार नई पहल को मंजूरी दी। इनमें बीज, कृषि-आदान, कृषि-पारिस्थितिकी (एग्रो-इकोलॉजी) और डिजिटल खेती शामिल हैं। भारत ने समूह से कहा कि वह वर्ष 2026 में अपनी अध्यक्षता के दौरान खाद्य सुरक्षा की सिर्फ बातें करने के बजाय ठोस कदम उठाए। नयी दिल्ली घोषणा जून, 2026 में इंदौर में हुई कृषि मंत्रियों की घोषणा पर आधारित है। इसमें चार पह -- एग्रिन, बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच, कृषि-पारिस्थितिकी पर उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क, और डिजिटल कृषि नेटवर्क -- को मंत्रियों के स्तर से राष्ट्राध्यक्षों के स्तर तक ले जाया गया है। नयी दिल्ली घोषणा में कहा गया, ‘‘हम मानते हैं कि ब्रिक्स देश दुनिया में खाद्य उत्पादन में अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए, कृषि उत्पादकता और स्थिरता बढ़ाने तथा वैश्विक खाद्य सुरक्षा और पोषण सुनिश्चित करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।’’ घोषणा में नेताओं ने खाद्य सुरक्षा और पोषण की रक्षा करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही, खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी से उतार-चढ़ाव और अचानक आपूर्ति में रुकावट (जैसे उर्वरकों की कमी) के असर को कम करने की बात भी कही गई। प्रस्तावित अनाज व्यापार मंच के बारे में घोषणा में कहा गया कि समूह अभी इस बात पर काम कर रहा है कि ब्रिक्स अनाज (ग्रेन) एक्सचेंज कैसे काम करेगा। साथ ही, भविष्य में इसे अन्य कृषि उत्पादों और जिंसों तक बढ़ाने की संभावना भी खुली रखी गई है। घोषणा में यह भी कहा गया कि समूह राष्ट्रीय नीतियों और अंतरराष्ट्रीय समन्वय पर आगे की चर्चाओं का समर्थन करने पर सहमत हुआ है। इसका मकसद खाद्य उपलब्धता, पहुंच, वहनीयता और स्थिरता में सुधार करना है। इसमें ब्रिक्स और अन्य विकासशील देशों में राष्ट्रीय खाद्य भंडार प्रणालियों और जलवायु-अनुकूल बीज प्रणालियों जैसे उपाय शामिल हैं। नेताओं ने इंदौर में हुई 16वीं ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक के नतीजों का स्वागत किया और ब्रिक्स एग्रिन (कृषि-इनपुट, आनुवंशिक संसाधन और सूचना नेटवर्क) स्थापित करने पर सहमति जताई। इसे एक ‘‘सहयोगात्मक, गैर-बाध्यकारी और किसान-केंद्रित’’ तंत्र बताया गया है। खाद्य सुरक्षा और पोषण पर दक्कन उच्च-स्तरीय सिद्धांतों को आगे बढ़ाते हुए, नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए ग्लोबल अलायंस अगेंस्ट हंगर एंड पावर्टी (भूख और गरीबी के खिलाफ वैश्विक गठबंधन) को एक अहम माध्यम के तौर पर फिर से मान्यता दी। साथ ही, मजबूत और भेदभाव-रहित आपूर्ति श्रृंखलाओं के जरिये ब्रिक्स देशों के बीच कृषि उत्पादों और आदान (इनपुट) के व्यापार को बढ़ाने का आह्वान किया। इस घोषणापत्र में पारिवारिक किसानों, छोटे किसानों, पशुपालकों, छोटे पैमाने पर मछली पकड़ने वालों, एक्वाकल्चर उत्पादकों, आदिवासी समुदायों, महिलाओं और युवाओं को कृषि और खाद्य प्रणालियों में जरूरी हिस्सेदार के तौर पर पहचाना गया। नेताओं ने इंदौर में हुई 16वीं ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक के नतीजों का स्वागत किया और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय तौर-तरीकों को अपनाते हुए एक सहयोगी, गैर-बाध्यकारी और किसान-केंद्रित व्यवस्था के तौर पर ब्रिक्स एग्रिन (कृषि आदानों, आनुवांशिक संसाधन और सूचना नेटवर्क) बनाने पर सहमति जताई। उन्होंने बीज प्रणाली में किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच की शुरुआत का भी स्वागत किया, जिसका मकसद पारंपरिक कृषि ज्ञान को दर्ज करना और उसका आदान-प्रदान करना है। साथ ही, उन्होंने जलवायु के प्रति सहिष्णु और उत्पादकता के लिए कृषि-पारिस्थितिकी और ‘रीजेनरेटिव’ कृषि पर उत्कृष्टता केन्द्रों का ब्रिक्स नेटवर्क’ और कृषि-वानिकी, मछली पालन और जलीय कृषि तक फैले डिजिटल कृषि पर ब्रिक्स नेटवर्क का भी स्वागत किया। घोषणापत्र में मौजूदा मंत्री-स्तरीय आदेशों और कृषि पर डब्ल्यूटीओ समझौते के तहत डब्ल्यूटीओ में कृषि से जुड़ी बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए समूह की प्रतिबद्धता को दोहराया गया। साथ ही, यह भी माना गया कि बदलते नियामकीय घटनाक्रम खेती के उत्पादन, व्यापार और छोटे किसानों की आजीविका पर तेजी से असर डाल रहे हैं। इसमें वैश्विक वनस्पति तेल क्षेत्र में टिकाऊपन और बाजार तक समान पहुंच को बढ़ावा देने के लिए चल रही कोशिशों का भी स्वागत किया गया।
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