जो हाथ कभी हथकड़ियों में जकड़े थे, अब वे तबले पर थिरक रहे हैं. हाथों की उंगलियां हारमोनियम के कीबोर्ड पर दौड़कर धुन छेड़ रहीं हैं. कुछ बंदी बांसुरी बजा रहे हैं तो कुछ कोरे कागज पर रंग भर रहे हैं. ये नजारा है मप्र की खंडवा जेल का.
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