धार शहर में 15 सितंबर को होने वाला वराह मार्च जिला प्रशासन ने रद्द कर दिया है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया है। शुक्रवार शाम पुलिस और प्रशासन की टीम शहर में निकली और मार्च से जुड़े बैनर-पोस्टर हटाए। लोगों से मार्च में शामिल नहीं होने और शांति बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की गई। सनातन प्रहरी की ओर से भगवान वराह जयंती के मौके पर पीजी कॉलेज से विजय मंदिर तक वाहन मार्च निकालने की तैयारी थी। संगठन ने शहर में इसका प्रचार भी किया था। 4 सितंबर को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंशुल शर्मा ने बताया था कि संगठन ने मार्च के लिए अनुमति का आवेदन नहीं किया था, बल्कि प्रशासन को इसकी जानकारी दी थी। अंशुल शर्मा के अनुसार, यह मार्च हर साल निकाला जाता है। भगवान वराह के दर्शन और लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इसकी तैयारी की जा रही थी। उन्होंने बताया था कि पिछले दो महीने से शहर में बैठकें कर मार्च की तैयारी चल रही थी और बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों के शामिल होने की उम्मीद थी। संगठन के पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होने पर विरोध की बात भी कही गई थी। धारा 163 लागू, बिना अनुमति कार्यक्रम पर होगी कार्रवाई एसडीएम राजकुमार हलदर ने बताया कि पुलिस प्रशासन से बातचीत के बाद मार्च की अनुमति रद्द की गई है। धार में धारा 163 लागू है। इसके चलते किसी भी जुलूस या कार्यक्रम के लिए प्रशासन की अनुमति जरूरी है। बिना अनुमति कार्यक्रम करने पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के अनुसार 15 सितंबर को मुस्लिम समाज की ओर से भी वाहन मार्च की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन उसे भी मंजूरी नहीं मिली। इस तरह दोनों समुदायों की ओर से प्रस्तावित वाहन मार्च की अनुमति रद्द हो चुकी है। इसके बाद शुक्रवार को पुलिस और प्रशासन ने शहर में लगे मार्च से जुड़े बैनर-पोस्टर हटाए। साथ ही लोगों से प्रशासन का सहयोग करने और शहर में शांति बनाए रखने की अपील की।
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