माघ मेला 2027 को आसान, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर तैयारी शुरू कर दी है। मेले में जरूरी नागरिक सुविधाओं की सप्लाई बिना रुकावट रखने और किसी भी तकनीकी खराबी की तुरंत पहचान के लिए इस बार आधुनिक SCADA (Supervisory Control and Data Acquisition) प्रणाली को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने का फैसला हुआ है। गुरुवार को मेला प्राधिकरण और जिला प्रशासन की समीक्षा बैठक हुई। इसमें कमिश्नर डॉ. लोकेश एम. ने विभागों के कामों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को तय समय में सभी काम पूरे करने के निर्देश दिए। बैठक में मेला अधिकारी ऋषिराज, नगर आयुक्त सीलम साई तेजा समेत सभी संबंधित विभागों के बड़े अधिकारी मौजूद रहे। कमिश्नर ने 10 सितंबर तक अपलोड किए जाने वाले विभागीय टेंडरों की ताजा स्थिति की जानकारी ली। समीक्षा में अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि तय तारीख तक ये टेंडर प्रक्रियाएं पूरी कर ली जाएंगी। मेला प्राधिकरण की ओर से टेंटेज, फर्नीचर, टिन फैब्रिकेशन, लैंड लेवलिंग, एफआरपी और स्टील टॉयलेट, साथ ही सक्शन मशीन से जुड़े 6 टेंडर किए जाएंगे। बिजली विभाग से मेला क्षेत्र की बिजली व्यवस्था से जुड़े 35 टेंडर किए जाएंगे। लोक निर्माण विभाग (PWD) इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़क कामों से जुड़े 10 टेंडर करने की तैयारी में है। जल निगम के कुल 14 टेंडरों में से 6 टेंडर तय समय में अपलोड कर दिए जाएंगे। कमिश्नर ने जल निगम और बिजली विभाग को माघ मेला के किसी एक सेक्टर में SCADA प्रणाली को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने के निर्देश दिए। जल निगम इस प्रणाली का उपयोग पाइपलाइन में पानी के बहाव, प्रेशर, ओवरहेड टैंकों में पानी के लेवल और वाल्व चलाने की रियल टाइम निगरानी और ऑटोमैटिक कंट्रोल के लिए करेगा। वहीं, बिजली विभाग फीडर, लोड बांटने और सप्लाई की स्थिति पर नजर रखने और खराबी की तुरंत पहचान के लिए इसका इस्तेमाल करेगा। इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के आधार पर भविष्य में (महाकुंभ/माघ मेला) पूरे मेला क्षेत्र में इस तकनीक को हमेशा के लिए लागू किया जाएगा। जल शुद्धता के लिए एरेटर अनिवार्य, BOD स्तर पर सख्त नज़र संगम में प्रवाहित होने वाले जल की स्वच्छता को लेकर प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। जल निगम को सीवेज एवं 'ग्रे वॉटर' के उपचार की व्यवस्था निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है। जल उपचार प्रक्रिया में एरेटर का उपयोग अनिवार्य किया गया है ताकि पानी में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) की मात्रा बढ़ सके। इससे जैविक पदार्थों के विघटन (Decomposition) की गति तेज होगी और नदियों में जाने वाले जल का बीओडी (BOD) स्तर निर्धारित मानकों पर रहेगा। नदियों में छोड़े जाने वाले उपचारित जल की गुणवत्ता की नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं। मंडलायुक्त ने चेतावनी दी कि जल की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। श्रमिकों की सुरक्षा और जलस्तर प्रबंधन की अग्रिम तैयारी सीवेज, फीकल मैटर और स्लज मैनेजमेंट के काम में जुटे सभी श्रमिकों और वेंडरों को पर्सनल प्रोटेक्टिव इविपमेंट (PPE), सुरक्षा परिधान, हाथ के दस्ताने व अन्य व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। टिहरी और नरौरा बैराज से समन्वय पिछले मेलों के अनुभवों को देखते हुए सिंचाई विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह टिहरी बांध, नरौरा बैराज और अन्य जल स्रोतों से होने वाले जल प्रवाह पर निरंतर निगरानी रखे। जल स्तर में अप्रत्याशित बदलाव की स्थिति से निपटने के लिए पानी का डायवर्जन और सक्शन मशीनों के माध्यम से जल निकासी की पूर्व-तैयारी रखने को कहा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति का तत्काल समाधान किया जा सके। मंडलायुक्त ने सभी विभागों को आपसी समन्वय, पारदर्शिता, स्वच्छता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए आगामी माघ मेला-2027 की सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
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