सुलतानपुर में सड़क चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के काम की जांच को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि जांच निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के होनी चाहिए। जांच की प्रक्रिया ऐसी हो, जिस पर किसी को कोई शक न हो। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की बेंच ने यह आदेश सिद्धार्थ इंफ्राहाइट प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर दिया। याचिकाकर्ता ने वीरसिंहपुर-पापरघाट-शाहपुर हरवंश मार्ग के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण की जांच के लिए 10 अप्रैल 2026 को जारी पत्र को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता भाजपा विधायक राज प्रसाद उपाध्याय 'राज बाबू' हैं। इसलिए जांच के दौरान उन्हें खास सम्मान दिया जा रहा है। इतना ही नहीं, जांच में उठाए जा रहे हर कदम की जानकारी भी विधायक को दी जा रही है। याचिकाकर्ता ने विधायक पर निर्माण काम में दखल देने का आरोप लगाते हुए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की थी। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों के पत्रों को देखने के बाद जांच जारी रखने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि जांच के दौरान विधायक के प्रति ज्यादा आदर दिखाने से बचा जाए। जांच की पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष को जांच की निष्पक्षता पर शक की गुंजाइश न रहे। इन टिप्पणियों के साथ कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
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