सरकारी स्कूलों के ऑडिट को लेकर रविवार शाम गांधी भवन में CJP की बैठक चल रही थी। इसी दौरान कुछ छात्र और युवा बैठक में पहुंच गए। काली टी-शर्ट पहने छात्रों ने पहले अभियान से जुड़े लोगों की बात सुनी और फिर उनसे सवाल-जवाब शुरू किए। बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और छात्रों ने नारेबाजी शुरू कर दी। मौके पर ‘यह दिल्ली नहीं, भोपाल है’, ‘कॉकरोच पार्टी मुर्दाबाद’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए गए। स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलने पर पुलिस का भारी बल मौके पर पहुंचा। पुलिस ने छात्रों और युवाओं को समझाइश दी। इसके बाद वे वहां से रवाना हो गए। घटना के दौरान किसी तरह की हिंसा होने की सूचना नहीं है। पहले बातचीत, फिर नारेबाजी प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, छात्रों का एक समूह बैठक के दौरान अंदर पहुंचा। इनमें कुछ छात्र काली टी-शर्ट पहने हुए थे, जबकि उनके साथ कुछ युवा भी थे। उन्होंने CJP के प्रतिनिधियों से स्कूलों के ऑडिट को लेकर सवाल किए। बातचीत के दौरान दिल्ली में हुए पिछले प्रदर्शनों और संगठन की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए गए। छात्र अंश पुरोहित ने बातचीत में कहा कि वे किसी समुदाय या राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे पुलिस और सेना का सम्मान करते हैं और किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते। हालांकि, उन्होंने CJP के लोगों से सवाल किया कि दिल्ली में हुए विवादों के बाद भोपाल में अभियान चलाने के दौरान ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। छात्रों ने बातचीत के दौरान कुछ गतिविधियों को ‘एंटीनेशनल’ बताते हुए भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि वे यह जानना चाहते हैं कि भोपाल में स्कूल ऑडिट के नाम पर चलाए जा रहे अभियान का वास्तविक उद्देश्य क्या है। ‘यह भोपाल है, दिल्ली नहीं’ छात्रों का कहना था कि दिल्ली में जो कुछ हुआ, उसे भोपाल में दोहराया नहीं जाना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने ‘यह दिल्ली नहीं, भोपाल है’ के नारे लगाए। इसके साथ ही ‘कॉकरोच पार्टी मुर्दाबाद’, ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘पुलिस प्रशासन हम तुम्हारे साथ हैं’ जैसे नारे भी लगाए गए। अंश पुरोहित ने कहा कि आंदोलन करने का अधिकार सभी को है, लेकिन आंदोलन का तरीका भी महत्वपूर्ण है। उनका आरोप था कि दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हुए थे। उन्होंने पूछा कि यदि CJP स्कूलों का ऑडिट कर रही है तो संगठन की पिछली गतिविधियों और उनसे जुड़े विवादों पर भी जवाब देना चाहिए। महिला प्रतिनिधि ने छात्रों को समझाने की कोशिश की हंगामे के बीच CJP की एक महिला प्रतिनिधि ने छात्रों को समझाने की कोशिश की। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे पहले पूरी बात सुनें। बातचीत के दौरान छात्रों की उम्र और उनके भविष्य को लेकर भी चर्चा हुई। इस पर छात्रों ने कहा कि वे विरोध करने के लिए नहीं आए हैं, बल्कि बैठक में चल रही चर्चा सुनने आए हैं। उनका कहना था कि अगर वे पूरी बात सुनेंगे ही नहीं तो सवाल कैसे पूछेंगे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रही। माइक को लेकर भी हुई खींचतान छात्रों ने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान उनके हाथ से माइक लेने की कोशिश की गई। अंश के मुताबिक, उनके हाथ से कई बार माइक लेने की कोशिश हुई। इसके बाद वहां मौजूद कुछ छात्र भावुक हो गए और नारेबाजी शुरू हो गई। हालांकि, CJP की ओर से माइक को लेकर लगाए गए इन आरोपों पर अलग से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। CJP बोली- ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति जानना उद्देश्य CJP की ओर से अभियान की कोऑर्डिनेटर माया विश्वकर्मा ने बताया कि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों का नागरिक स्तर पर ऑडिट किया जाएगा। उनका कहना है कि प्रदेश में बड़े ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्र हैं, जहां अधिकारी नियमित रूप से नहीं पहुंच पाते। ऐसे में जनता के माध्यम से स्कूलों की जमीनी स्थिति का डेटा तैयार किया जाएगा। सर्वे में पानी, शौचालय, बिजली, कक्षाओं की स्थिति, शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात, विद्यार्थियों की उपस्थिति, पाठ्यपुस्तक, यूनिफॉर्म, छात्रवृत्ति और मिड-डे मील जैसी व्यवस्थाएं देखी जाएंगी। स्कूल भवन की सुरक्षा, फर्स्ट-एड, अग्निशामक यंत्र, दिव्यांग विद्यार्थियों की सुविधाएं, पुस्तकालय और कंप्यूटर की उपलब्धता भी जांची जाएगी। नरसिंहपुर से होगी आगे की शुरुआत माया विश्वकर्मा के मुताबिक, अभियान 15 अगस्त को शुरू किया गया था। रविवार की बैठक के बाद नरसिंहपुर जिले के साईंखेड़ा ब्लॉक में एक स्कूल का ऑडिट किया जाना है। इसके बाद भोपाल समेत अलग-अलग क्षेत्रों में भी सर्वे किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शुरुआत स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं से की जा रही है। आगे बच्चों की पाठ्यक्रम, शिक्षक और अन्य शैक्षणिक समस्याओं को भी अभियान में शामिल किया जाएगा। पुलिस ने समझाइश देकर छात्रों को रवाना किया छात्रों की नारेबाजी और बहस की सूचना के बाद मौके पर भारी पुलिस बल पहुंच गया। पुलिस ने स्थिति को संभाला और छात्रों तथा युवाओं को समझाइश दी। इसके बाद छात्र वहां से रवाना हो गए। घटना के बाद अब सवाल यह है कि स्कूलों की व्यवस्था को लेकर शुरू किया गया CJP का नागरिक ऑडिट अभियान किस तरह आगे बढ़ेगा और विवाद के बीच तैयार होने वाली रिपोर्ट को किस रूप में सार्वजनिक किया जाएगा।
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