अमेरिका में सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर चल रही बड़ी कानूनी लड़ाई में इंस्टाग्राम के प्रमुख एडम मोसेरी की गवाही ने कंपनी के सामने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मेटा के खिलाफ चल रहे मुकदमे की सुनवाई के दौरान मोसेरी ने स्वीकार किया कि किशोरों के लिए बनाई गई ‘टेक अ ब्रेक’ सुविधा को डिफॉल्ट रूप से लागू किए जाने से पहले उसका इस्तेमाल करने वाले युवाओं की संख्या बेहद कम थी। अदालत में मोसेरी ने बताया कि सुविधा को शुरू किए जाने के शुरुआती वर्षों में ज्यादातर किशोर इसे इस्तेमाल नहीं करना चाहते थे। हालांकि, कंपनी ने इसके बावजूद इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया। अमेरिका के 29 राज्यों की ओर से दायर मुकदमे में इसे मेटा की नीतियों और उसके सुरक्षा दावों से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत के तौर पर देखा जा रहा है। मौजूद जानकारी के अनुसार, ‘टेक अ ब्रेक’ सुविधा किशोरों को एक निश्चित समय तक ऐप इस्तेमाल करने के बाद उसे बंद करने के लिए प्रोत्साहित करती है। मोसेरी ने बताया कि डिफॉल्ट व्यवस्था लागू होने से पहले केवल एक से दो प्रतिशत खातों में इसका इस्तेमाल हो रहा था। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कंपनी ने इस कम इस्तेमाल के आंकड़े को सार्वजनिक रूप से सामने नहीं रखा था। गौरतलब है कि मोसेरी ने दिसंबर 2021 में एक ब्लॉग में दावा किया था कि सुविधा शुरू करने वाले 90 प्रतिशत से अधिक किशोर उसे चालू रखते थे। अदालत में यह स्पष्ट हुआ कि यह आंकड़ा सभी किशोर उपयोगकर्ताओं का नहीं, बल्कि केवल उन लोगों का था जिन्होंने खुद इस सुविधा को सक्रिय किया था। मामले में पूर्व मेटा कर्मचारियों की गवाही भी कंपनी के लिए परेशानी बढ़ा रही है। मेटा के पूर्व इंजीनियरिंग निदेशक आर्तुरो बेहार ने कहा था कि उनके अनुभव में ‘टेक अ ब्रेक’ ऐसी सुविधा थी जिसे सफल होने के लिए ही ठीक से तैयार नहीं किया गया था। इंस्टाग्राम में सुरक्षा सुविधाओं पर काम कर चुके जॉर्ज वोलिचेंको ने भी किशोरों के बीच ऐसी सुविधाओं के इस्तेमाल को बेहद कम बताया। अमेरिका के राज्यों का आरोप है कि मेटा ने फेसबुक और इंस्टाग्राम को इस तरह तैयार किया कि युवा उपयोगकर्ता ज्यादा समय तक इन पर बने रहें। कैलिफोर्निया, कोलोराडो, केंटकी और न्यू जर्सी समेत राज्यों ने कंपनी पर युवाओं में चिंता, अवसाद और आत्महत्या जैसे गंभीर प्रभावों से जुड़े जोखिमों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। सभी 29 राज्यों का यह भी कहना है कि 13 साल से कम उम्र के बच्चों के निजी आंकड़ों को गलत तरीके से एकत्र और इस्तेमाल किया गया। मेटा ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उसके शोध में किशोरों के सामाजिक माध्यम इस्तेमाल और उनके मानसिक स्वास्थ्य के बीच कोई स्पष्ट सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है। मुकदमे में करीब 200 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग की गई है। बता दें कि सुनवाई करीब छह सप्ताह तक चल सकती है। जूरी की ओर से सलाहकारी फैसला आने की उम्मीद है, जबकि अंतिम रूप से मेटा की जिम्मेदारी और संभावित जुर्माने समेत अन्य बदलावों पर अमेरिकी जिला न्यायाधीश यवोन गोंजालेज रोजर्स फैसला करेंगी।
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