मेरठ कांवड़ मार्ग पर शिवभक्तों की बढ़ती मौजूदगी के साथ सुरक्षा व्यवस्था को और अभेद्य बना दिया गया है। रविवार से मेरठ में एटीएस यानी आतंकवाद निरोधक दस्ते की विशेष ड्रोन टीम ने भी मोर्चा संभाल लिया। लखनऊ से पहुंची यह टीम अत्याधुनिक टीथर्ड ड्रोन के जरिए कांवड़ मार्ग और उससे जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों पर चौबीसों घंटे नजर रख रही है। यह ड्रोन दिन के साथ-साथ रात के अंधेरे में भी करीब एक किलोमीटर के दायरे तक गतिविधियों पर नजर रखने में सक्षम है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां इसकी मदद से किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल कार्रवाई कर सकेंगी। कांवड़ यात्रा हमेशा से संवेदनशील रही है। इसी सवंदेनशीलता को देखते हुए पश्चिम उत्तर प्रदेश के कांवड़ मार्ग से जुड़े प्रत्येक संवेदनशील जिले में एटीएस की ऐसी विशेष ड्रोन टीम तैनात की गई है। पहली बार इस स्तर पर हाईटेक निगरानी को सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है, जिससे यात्रा के दौरान किसी भी तरह की आतंकी या असामाजिक गतिविधि की आशंका पर तुरंत नजर रखी जा सके। टीथर्ड ड्रोन ने निगरानी को बनाया खास टीथर्ड ड्रोन अब तक मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और अति संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी में इस्तेमाल होता रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लगातार 72 घंटे तक उड़ान भर सकता है। बेहतर विजिबिलिटी और अत्याधुनिक कैमरों से लैस यह ड्रोन 10X ऑप्टिकल जूम के जरिए करीब 50 मीटर की ऊंचाई से पूरे इलाके की बारीकी से निगरानी करता है। इसकी लाइव वीडियो और रिकॉर्ड की गई फुटेज एटीएस और स्थानीय पुलिस को रियल टाइम इनपुट उपलब्ध कराती है। रस्सीनुमा केबल से विद्युत सप्ताई दरअसल, टीथर्ड ड्रोन सामान्य ड्रोन की तरह केवल बैटरी पर निर्भर नहीं रहता। इसकी इनबिल्ट बैटरी का बैकअप सीमित होने के कारण इसे जमीन से रस्सीनुमा केबल के माध्यम से लगातार बिजली की आपूर्ति दी जाती है। यही केबल इसे लंबे समय तक हवा में स्थिर रखती है और निर्बाध निगरानी संभव बनाती है। टीथर्ड ड्रोन ने दिया मजबूत कवच पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कांवड़ यात्रा के दौरान पहले से ही सीसीटीवी कैमरे, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, एएनपीआर कैमरे और कंट्रोल रूम सक्रिय हैं। अब एटीएस के टीथर्ड ड्रोन के जुड़ने से सुरक्षा व्यवस्था को एक और मजबूत तकनीकी कवच मिल गया है। ड्रोन से मिलने वाली हर गतिविधि पर एटीएस, स्थानीय पुलिस और कंट्रोल रूम की टीमें लगातार नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि में तुरंत कार्रवाई की जा सके। अन्य जिलों से पहुंचने लगी फोर्स सुरक्षा घेरा कितना मजबूत होगा, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां अन्य जनपदों से भी पुलिस फोर्स बुलाया गया है। कांवड़ मार्ग की 24 घंटे निगरानी शुरु हो चुकी है। इसके अलावा आरआरएफ को भी कांवड़ मार्ग का जिम्मा सौंप दिया गया। चार से पांच स्पॉट हैं, जहां आरआरएफ को लगाया गया है। यह जवान ना केवल अव्यवस्था फैलाने वालों से निबटने में माहिर हैं बल्कि कांवड़ यात्रा के महत्व को भी यह बेहतर समझते हैं। वॉच ट्रॉवर भी किए गए एक्टिव सुरक्षा के दृष्टिगत कांवड़ मार्ग पर कई जगह वॉच टॉवर बनाए गए हैं। रेंज की बात करें तो 21 से ज्यादा वॉच टॉवर बने हैं। इनमें सबसे ज्यादा वॉच टावर हापुड़ जनपद में हैं। मेरठ के रुड़की रोड पर मोदीपुरम में वॉच टावर बना है, जहां पुलिस का जवान हाईटेक बाइनोकुलर के साथ पहरा दे रहा है।
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